कसाब को फांसी देने में सालों लग सकते हैं
इस पूरी प्रक्रिया में कई साल भी लग सकते हैं क्योंकि अभी भी 52 लोगों की मौत की सजा को लागू करने के लिए राष्ट्रपति की सहमति का इंतजार है, वहीं निचली अदालतों से फांसी की सजा पाए 300 दोषियों के मामले सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं।
अगर कसाब फांसी की सजा को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देता है और यदि न्यायालय ने उसके मामले की तेज सुनवाई की तो भी कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार मामले के निपटारे में कम से कम पांच वर्ष का समय लग सकता है।
यदि सर्वोच्च न्यायालय ने फांसी की सजा को बरकरार रखा तो कसाब फैसले की समीक्षा के लिए फिर अपील कर सकता है। सर्वोच्च न्यायालय के अपने फैसले पर कायम रहने की स्थिति में वह तीसरी बार 'उपचारात्मक याचिका' के माध्यम से कुछ कानूनी सवाल उठा सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय के अपने फैसले पर कायम रहने की स्थिति में कसाब संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका पेश कर सजा से मुक्ति या फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की अपील कर सकता है।
फांसी की सजा पाने वालों की सूची में दिसंबर 2001 को संसद भवन हमले में भूमिका के लिए दोषी अफजल गुरु भी है। राष्ट्रपति को भेजी गई गुरु की दया याचिका अभी केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास लंबित है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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