'लोगों को विकास चाहिए'

'लोगों को विकास चाहिए'

अमित बरुआ

बीबीसी हिंदी सेवा प्रमुख

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा है कि बस्तर के लोगों को विकास चाहिए और वो समझ गए हैं कि नक्सली मसीहा नहीं है.

मुख्यमंत्री का कहना था कि लोगों ने नक्सलियों को मुक्तिदाता और मसीहा समझा था लेकिन अब लोगों को समझ में आ गया है कि नक्सली ही इस इलाक़े में सबसे अधिक धन उगाही में लगे हैं.

बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि तेंदू पत्ता का कारोबार हो या ठेकेदारों से वसूली हो, नक्सली पैसा उगाही कर रहे है. खानों के ठेकेदारों से जंगल में काम करने वाले सरपंचों से पैसा उगाही हो रही है.

रमन सिंह का कहना था कि नक्सलियों का सही चेहरा लोगों के सामने आ रहा है और इसी कारण लोगों ने नक्सलियों का विरोध किया है जिसे सरकार समर्थन दे रही है.

उनका कहना था कि पिछले महीने की घटना को छोड़ दिया जाए तो बस्तर में काफ़ी विकास हुआ है और हिंसा की घटनाओं में कमी आई थी.

नक्सलियों के ख़िलाफ़ सेना के उपयोग पर उनका कहना था कि सेना या वायु सेना का उपयोग सामरिक मदद तक सीमित हो क्योंकि सेना की बमबारी अगर जंगलों में होगी तो वहां आम लोगों को ही नुकसान होगा.

नक्सलियों के ख़िलाफ़ गठित स्थानीय लोगों के सलवा जुडुम के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि वो कभी नहीं चाहते थे कि ये लोग स्थायी रुप से कैंपों में रहे और जैसे जैसे विकास होगा सलवा जुड़ुम से जुड़े आदिवासी अपने गांवों में वापस जा सकेंगे.

इन आरोपों पर कि बस्तर में खनन प्रक्रिया में पूंजीवादियों को लाने के कारण नक्सलियों के प्रति लोगों का समर्थन बढ़ा है, रमन सिंह ने साफ़ किया कि बस्तर में राष्ट्रीय खनन विभाग ही खनन कार्य कर रहा है.

उन्होंने बताया कि पिछले दिनों एस्सार और टाटा कंपनी को अनुबंध दिए गए हैं लेकिन इन दोनों ही कंपनियों को अपना काम शुरु करने में दस साल तक का समय लगेगा.

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के उस लेख पर जिसमें उन्होंने रमन सिंह के के इस्तीफ़े की मांग की थी, मुख्यमंत्री ने कहा कि दिग्विजय सिंह को खुद सोचना चाहिए कि जब वो खुद मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने बस्तर का बिल्कुल विकास नहीं किया.

रमन सिंह का कहना था, ‘‘आज दिग्विजय सिंह सलाह दे रहे हैं. इस्तीफ़ा मांग रहे हैं. वो मुख्यमंत्री थे तो बस्तर के लिए कुछ नहीं किया. उनके समय में उन्हीं के मंत्री की नक्सलियों ने गला काट कर हत्या कर दी थी.वो नक्सली हिंसा बढ़ाने के लिए सबसे अधिक ज़िम्मेदार हैं.’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि वो नक्सलियों के साथ बातचीत के लिए भी तैयार हैं लेकिन यही साफ नहीं हो पाता है कि नक्सलियों की तरफ से बात कौन करेगा. उनका कहना था कि नक्सली बात करने के नाम पर समय लेते हैं ताकि वो अपनी शक्ति को पुनर्गठित कर सकें.

उन्होंने कहा कि नक्सलियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होती रहनी चाहिए और समर्पण एवं बातचीत का रास्ता भी खुला रहना चाहिए. साथ ही विकास कार्य भी होते रहने चाहिए तभी इस समस्या से निपटा जा सकेगा.

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