राहगीरों की प्यास बुझा शिक्षा की अलख जगा रहे हैं शिक्षक
अनिल शर्मा
अलवर (राजस्थान), 17 अप्रैल (आईएएनएस)। पानी और साक्षरता के लिए तरसते राजस्थान के अलवर में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक प्यासे राहगीरों को पानी पिला रहे हैं और उनसे बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराने को कह रहे हैं।
प्रताप सीनियर सेकंडरी स्कूल के परिसर के नजदीक एक प्याऊ शुरू लगाया गया है। शिक्षक व अन्य स्टाफ सदस्य यहां पर राहगीरों को पानी पिलाते हैं और उन्हें यहां मिलने वाली शिक्षा व अन्य सुविधाओं के संबंध में बताते हैं।
प्याऊ शुरू करने का विचार स्कूल के प्राचार्य चाणक्य लाल शर्मा का था। वह खुद भी प्याऊ पर बैठते हैं और लोगों से बातचीत करते हैं।
शर्मा ने आईएएनएस को बताया, "स्कूल में छात्रों का नामांकन बढ़ाने के उद्देश्य से ऐसा किया जा रहा है। इस समय हमारे पास केवल 52 छात्र हैं और मैं चाहता हूं कि अगला शिक्षण सत्र शुरू होने तक हमारे पास कम से कम 200 छात्र हों।"
प्याऊ परामर्श सत्र के दौरान लोगों को बताया जाता है कि स्कूल में बच्चों को शिक्षा देने के अलावा उन्हें सामाजिक रूप से उपयोगी उत्पादक कार्यो (एसयूपीडब्ल्यू) और नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) से भी जोड़ा जाता है।
स्टाफ द्वारा लोगों को बताया जाता है कि स्कूल बच्चों को शैक्षिक यात्राओं पर भी ले जाता है और छात्राओं को वर्दी, साइकिल और किताबें मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती हैं।
दूर से आने वाले छात्रों को आने-जाने की सुविधा के लिए बस पास दिए जाते हैं।
पिछले शिक्षण सत्र में इस स्कूल में कवल 40 छात्र और 28 स्टाफ सदस्य थे।
शर्मा ने कहा, "बच्चों के परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने और पढ़ाई में उनके अच्छे न होने के बावजूद हम लोगों से उन्हें स्कूल भेजने के लिए कहते हैं। हम उनके माता-पिता से कहते हैं कि हम उनके लिए विशेष कक्षाएं चलाएंगे।"
उन्होंने कहा, "हमारे सभी छात्रों के होशियार न होने के बावजूद हमारे यहां इस साल आठवीं का परीक्षाफल 100 प्रतिशत रहा है।"
शर्मा ने कहा कि एक मई से उनके साथी शिक्षक स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने की कोशिश करेंगे।
वर्ष 2001 में हुई जनगणना के मुताबिक राजस्थान में साक्षरता 60.41 प्रतिशत थी जबकि राष्ट्रीय साक्षरता औसत 64.84 प्रतिशत था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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