भारत में शौचालय कम, मोबाइल अधिक : संयुक्त राष्ट्र
'यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट फॉर वॉटर, एंवायरमेंट एंड हेल्थ' (आईडब्ल्यूईएच) के निदेशक जफर अदील ने कहा, "यह दुखद संयोग है कि भारत अब इतना अमीर हो गया है कि यहां की जनता के पास मोबाइल फोन की भरमार है जबकि आधी से अधिक जनसंख्या के पास शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा नहीं है।"
आंकड़ों के मुताबिक भारत में 54.5 करोड़ मोबाइल फोन हैं। इनसे देश की 45 फीसदी जनसंख्या की जरूरत पूरी होती है लेकिन शौचायलों के मामले में यह देश काफी पीछे है। यहां 2008 तक 36.6 करोड़ शौचालय थे, जिनसे 31 फीसदी जनसंख्या की जरूरतें ही पूरी हो पाती हैं।
यूनाइट नेशंस यूनिवर्सिटी (यूएनयू) ने ये आंकड़े बुधवार को जारी किए। उसका मुख्य मकसद यह है कि 'मिलिनियम डेवलपमेंट गोल' (एमडीजी) के माध्यम से अधिक से अधिक लोगोंे तक साफ पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा सकें।
इस दिशा में भारत में काम कर रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रेन्स फंड (यूनिसेफ) जैसी शीर्ष संस्थाओं का आकलन है कि 2015 तक के निर्धारित समय तक भारत में एक अरब लोग शौचालयों की सुविधा से वंचित रहेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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