पंजाब विश्वविद्यालय में हिंसा, अपराध और राजनीति का चलन
चण्डीगढ़, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। मुठभेड़, कारों में आग लगाना, रैगिंग, धन व बाहुबल का प्रदर्शन और घटिया राजनीति, ये किसी हिंसक फिल्म की कहानी नहीं बल्कि मौजूदा समय में पंजाब विश्वविद्यालय की जमीनी हकीकत है।
पिछले सप्ताह पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (पूसू) के अध्यक्ष उदय, उनके चचेरे भाई और उनके पिता पर सेक्टर-11 स्थित उनके घर के बाहर कुछ लोगों ने गोलियां चलाईं।
पुलिस ने तेजी दिखाते हुए इस मामले में स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ पंजाब यूनिवर्सिटी (सोपू) के दो नेताओं को गिरफ्तार किया। सोपू संगठन पूसू का विरोधी खेमा है। इनके पास से एक देशी कट्टा भी बरामद किया गया।
इसके बाद कुछ अज्ञात लोगों ने सोमवार को उदय के घर में खड़ी उनकी पजेरो और मारुति स्टीम कार में आग लगा दी।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एस. एस. श्रीवास्तव ने आईएएनएस से कहा, "हम इन मामलों को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं और वरिष्ठ अधिकारी इन मामलों की जांच कर रहे हैं। असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए हमने पंजाब विश्वविद्यालय के अंदर और बाहर पुलिस निगरानी बढ़ा दी है।"
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2005 से लेकर अब तक पंजाब विश्वविद्यालय में प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच हुई हिंसा के करीब 30 मामले दर्ज किए गए हैं और पूछताछ के लिए करीब 90 लोगों को गिरफ्तार किया गया है या हिरासत में लिया गया है।
पंजाब विश्वविद्यालय में मौजूदा समय में छात्र राजनीति से जुड़े करीब पांच संगठन सक्रिय हैं। इनमें पूसू, सोपू, इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (आईएनएसओ), द नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) शामिल हैं।
पूसू और सोपू हालांकि पुराने प्रतिद्वंद्वी हैं और टकराव के ज्यादातर मामले इन्हीं दोनों संगठनों के बीच आए हैं। यहां तक कि पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल (पूयूसीएससी) के ज्यादातर अध्यक्ष इन्हीं दोनों संगठनों से चुने गए हैं।
पंजाब विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष मनजीत सिंह ने आईएएनएस से कहा, "छात्र यहां पढ़ाई के लिए आते हैं और यह धन और बाहुबल दिखाने की जगह नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन को हिंसा में शामिल छात्रों पर कार्रवाई करना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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