बरसों से बेड़ियों में जकड़ा है काका (फोटो सहित)
उमेश उर्फ काका नाम का यह युवक दिल्ली-देहरादून राजमार्ग पर गांव फलौदा के बाहर ही एक छोटी सी झोपड़ी में रहता है। उसके पैरों में मोटी-मोटी संकलें पहनाई गई हैं जबकि कभी उसका भी भरा-पूरा परिवार था। काका की पत्नी चन्द्रकिरण व दो बच्चे भी उसकी इस अवस्था को देखकर साथ छोड़े चुके हैं। अब काका का खुद पर काबू नहीं है। गांव के लोग उससे बचने की कोशिश करते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि वह कभी भी उन पर हमला कर सकता है।
काका के मां-बाप की आर्थिक स्थिति बेहद ही दयनीय है। उन्होंने जितना संभव हो सका उसका उपचार कराया लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। उसके पिता बुधराम को उम्मीद है कि कोई व्यक्ति या संस्था फरिश्ता बनकर उनके बेटे का इलाज कराएगी और उनका बेटा बेड़ियों से आजाद हो जाएगा। उनका कहना है, "गरीबी ने अब हमारें आंसुओं को भी पी लिया है। हम हमेशा ईश्वर से उसके ठीक होने की कामना करते हैं।"
काका की मां भी कहती हैं कि वह किसी को नुकसान न पहुंचाए, इसलिए उसको जंजीरों से बांधकर रखा है। उनको उम्मीद है कि मानसिक विकलांगों की संस्थाओं, स्वयंसेवी अस्पतालों और समाजसेवी लोगों से उन्हें मदद मिलेाी। वह कहती हैं कि गरीबी के कारण वे लोग यह दिन देखने को मजबूर हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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