राजनीतिक दल बनाते हैं अमीरों को उम्मीदवार
रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में प्रदेश के 29 संसदीय क्षेत्रों से कुल 429 उम्मीदवार मैदान में थे। जिनमें से 43 उम्मीदवार करोड़पति थे। इस मामले में कांग्रेस सबसे आगे रही थी जिसने 28 में से 21 करोड़पतियों को चुनाव मैदान में उतारा था। वहीं भारतीय जनता पार्टी के 29 में से 6 उम्मीदवार करोड़पति थे। वहीं बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने चार-चार करोड़पतियों को मैदान में उतारा था।
तमाम राजनीतिक दल हमेशा राजनीति के अपराधीकरण पर न केवल चिंता जताते हैं बल्कि अपराधियों को राजनीति में प्रवेश करने से रोकने की वकालत करते हैं, मगर देखा जाए तो पार्टियां ऐसे लोगों को टिकट देने में पीछे नहीं है जिन पर मामले दर्ज हैं।
कांग्रेस के 28 में से 8 ऐसे उम्मीदवार थे जिन पर आपराधिक मामले लंबित हैं। इसी तरह भाजपा ने दो आपराधिक प्रकरणों में उलझे लोगों को उम्मीदवार बनाया था। वहीं बसपा ने आपराधिक पृष्ठभूमि के छह उम्मीदवार मैदान में उतारे थे।
रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव जीतकर पहुंचे 29 में से चार सांसद ऐसे हैं जिन पर आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें से दो भाजपा और दो कांग्रेस के सांसद हैं।
एसोसिएशन आफ डेमोक्रेटिक रिफार्म(एडीआर) व नेशनल इलेक्शन वॉच के राष्ट्रीय समन्वयक अनिल बैरवाल और नेशनल इलेक्शन वॉच के प्रदेश समन्वयक राकेश रंजन ने गुरुवार को रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि तमाम राजनीतिक दल साफ सुथरी राजनीति की बात करते हैं, मगर उसके लिए पहल नहीं करते।
उन्होंने कहा कि दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस के तमाम नेता राजनीति का अपराधीकरण रोकने की बात करते हैं परंतु उम्मीदवार बनाने की बारी आती है तो उन्हीं को चुनते हैं। वहीं आम आदमी की सत्ता में भागीदारी की बात कर मतदाताओं को लुभाया जाता है परंतु उम्मीदवार करोड़पतियों को बनाया जाता है। यही लोग चुनाव जीतकर संसद में पहुंचते हैं।
रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि राजनीतिक दल कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। चुनाव से पहले बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं परंतु अमल में नहीं आती।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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