'पाक में राष्ट्रपति के अधिकार कम होंगे'

पाकिस्तान में संसद की एक समिति ने राष्ट्रपति के अधिकारों को सीमित करने वाले संविधान के 18वें संशोधन का मसौदा तैयार कर लिया है और अब शुक्रवार को उसे संसद में पेश किया जाएगा.
संसद की यह संवैधानिक समिति राष्ट्रपति के अधिकार प्रधानमंत्री और संसद को स्थानांतरित करने और संसद को भंग करने के राष्ट्रपति के अधिकार ख़त्म करने पर काम रही थी.
समिति के सभी सदस्यों ने संविधान के 18वें संशोधन के मसौदे को तैयार कर उस हस्ताक्षर कर दिए है.
इस में राष्ट्रपति के अधिकार घटाने, पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत का नाम ख़ैबर पख़तूनख़्वा रखने और जजों की नियुक्ति के लिए बने आयोग के सदस्यों में बढ़ोत्री जैसे प्रस्ताव शामिल हैं.
पीपुल्स पार्टी के नेता और इस समित के एक सदस्य सेनेटर रज़ा रब्बानी ने पत्रकारों को बताया कि मसौदे को राष्ट्रीय एजेंसी की अध्यक्ष फहमीदा मिर्ज़ा के हवाले कर दिया गया है और अब इसे संसद में पेश किया जाएगा.
उन्होंने आगे कहा, “सभी संसदीय दलों के बीच सहमति हुई जिस के कारण एक लोकतात्रिक पाकिस्तान की स्थापना हुई है.”
उन्होंने बताया कि इस के पारित होने के बाद संसद और मज़बूत हो जाएगी.
इस संशोधन पर पीपुल्स पार्टी और विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ की बीच काफी मजभेद थे. लेकिन मुस्लिम लीग नवाज़ के नेता एहसन इक़बाल ने बताया कि काफी हद तक उन की आपत्तियाँ दूर हो गई हैं.
उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "हमारी आपत्ति जजों की नियुक्ति के लिए बने आयोग के सदस्यों पर थी जिन की संख्या छह है और हम चाहते हैं कि सदस्यों की संख्या 7 होनी चाहिए ताकि फैसला लेने में आसानी हो."
उन्होंने कहा, "समिति ने आयोग के लिए सात सदस्यों के हमारे प्रस्ताव को मान लिया है."
ग़ौरतलब है कि मसौदा परित होने का बाद संविधान 1973 की शकल में बहाल हो जाएगा जिसमें प्रधानमंत्री के पास सेनाध्यक्ष को नियुक्त करने और संसद को भंग करने के अधिकार मिल जाएंगे. अब तक ये अधिकार राष्ट्रपति के पास हैं.












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