गडकरी ने पीएम से पूछे 14 सवाल

गडकरी ने महंगाई के बारे में प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि देश में मुद्रास्फीति की दर 11 प्रतिशत है जो पूरी दुनिया में सबसे अधिक है। चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि की दर 9.5 प्रतिशत (भारत की 7.2 प्रतिशत) है और मुद्रास्फीति की दर केवल दो प्रतिशत है वहीं भारत में 11 प्रतिशत है।
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गडकरी ने कहा कि पूरी दुनिया में जहां महंगाई की दर एक या दो प्रतिशत है वहीं भारत में मुद्रास्फीति की दर 11 प्रतिशत है। अन्य देशों के मुकाबले भारत में चीनी की कीमतें करीब दोगुनी और गेहूं 80 प्रतिशत महंगा है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि देश में खाद्य पदार्थो की कीमतें विश्व बाजार की तुलना में करीब 80 प्रतिशत अधिक हैं। उन्होंने कहा, "क्या यह सच नहीं है कि आपके शासन काल में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें दोगुनी हो गईं हैं?"
गडकरी ने सरकार पर आरोप लगाया कि 48 लाख टन चीनी का निर्यात 12.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से किया गया और फिर उसे 22 रुपये से 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से आयात किया गया। उन्होंने कहा कि योजना आयोग ने वर्ष 2005 में गरीबी की रेखा के नीचे (बीपीएल) रहने वाले लोगों की संख्या 31 करोड़ बताई थी, दिसंबर 2009 में तेंदुलकर समिति ने उनकी संख्या 42 करोड़ आंकी थी। आयोग का दावा है कि 'गरीबी घटी है'।
खाद्य महंगाई की दर में वृद्धि पर सवाल उठाते हुए गडकरी ने कहा कि किसानों को उनके उत्पादन का मूल्य क्यों कम मिलता है और उसके लिए आम आदमी को अधिक कीमत क्यों चुकानी पड़ती है? गडकरी ने कहा कि सरकार के मंत्री उत्पादन के कम होने के बारे में अटकलबाजी करते हैं। उत्पादन/मांग के कृत्रिम आंकड़ों से किसको लाभ हो रहा है? भाजपा अध्यक्ष ने पूछा कि खाद्य पदार्थो की कमी की भविष्यवाणी में सरकार के क्या निहित स्वार्थ हैं? इससे कीमतों पर नियंत्रण होता है या लोगों में घबराहट पैदा होती है।












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