नए सेना प्रमुख के सामने आधुनिकीकरण मुख्य चुनौती
नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। बुधवार को नए सेना प्रमुख का कार्यभार ग्रहण करने वाले लेफ्टिनेन्ट जनरल वी.के.सिंह के सामने रणनीतिक और सामरिक चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। इनमें लंबे समय से लंबित पड़ा तोपखाने के आधुनिकीकरण का कार्यक्रम शामिल है। इसके कारण सेना की गोलाबारी की क्षमता क्षीण हो गई है।
वर्ष 1980 के दशक में सामने आए बोफोर्स तोप दलाली के मामले का भूत अभी भी हथियारों की खरीददारी पर छाया हुआ है। सेना के पास 1986 में खरीदी गई 410 बोफोर्स तोपों में से लगभग आधी ही सही हालात में हैं।
15 वर्ष बाद 155 मिलीमीटर की अति हल्के वजन वाली लेजर इनर्शियल आर्टिलरी पॉइंटिंग सिस्टम (एलआईएनएपीएस) युक्त 145एम777 तोपों के लिए 64.70 करोड़ डॉलर का सौदा हुआ, लेकिन इसी क्षमता वाली कोई 300 स्वचालित तोपों के बारे में अभी तक निर्णय नहीं हो पाया है।
रक्षा मंत्रालय ने इन स्वचालित तोपों के क्षेत्र परीक्षण के लिए हरी झंडी तो दे दी है, लेकिन उसके साथ एक आपत्ति भी जोड़ दी है। आपत्ति यह है कि इस सौदे में शामिल एक मात्र कंपनी, सिंगापुर टेक्नोलॉजीज काइनेटिक्स को पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त होना होगा। हालांकि कंपनी ने भ्रष्टाचार के आरोप से स्पष्ट रूप से इंकार किया है। उसने कहा है कि अपने को बेगुनाह साबित करने के लिए कंपनी सीबीआई या और किसी के लिए भी अपने दस्तावेज खोलने को तैयार है।
इसके बाद सेना को यह यह तय करना है कि वह कितने स्वदेशी अर्जुन मुख्य युद्धक टैंकों (एमबीटी) को खरीदना चाहती है। फिलहाल 124 अर्जुन टैंकों के लिए आर्डर दिया गया है और विभिन्न अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अर्जुन टैंकों की खरीददारी यहीं पर रोक दी जाएगी।
अर्जुन टैंक का विकास करने वाले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने इसका विरोध किया है। डीआरडीओ चाहता है कि उसकी दशकों की मेहनत को सार्थक करने के लिए सेना और अर्जुन टैंकों को खरीदे।
इस तरह से देखा जाए तो नए सेना प्रमुख सिंह के सामने चुनौतियां भरी पड़ी हैं, जिनसे उन्हें निपटना है।
तीसरी पीढ़ी के सैन्य अधिकारी सिंह की नियुक्ति 14 जून, 1970 को राजपूत रेजीमेंट में हुई थी। अपने लगभग 40 वर्षो के कॅरियर के दौरान उन्होंने विभिन्न कमांड, स्टाफ और निर्देशात्मक नियुक्तियों में अपनी सेवाएं दी है।
सिंह ने 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में और श्रीलंका में 1980 के दशक के मध्य में भारतीय शांति सेना के अभियान में हिस्सा लिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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