गुलाम बनने से इंकार कर दिया मैंने : कबीर सुमन (लीड-1)

संगीत और कला की दुनिया से राजनीति में कदम रखने वाले सुमन ने कहा, "मैं पार्टी का गुलाम नहीं हूं। मैं एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि हूं। मुझे पार्टी ने नहीं चुना है। मैं केवल जनता का गुलाम हो सकता हूं।"

जाने-माने गायक और कवि सुमन ने कहा कि उन्हें सांसद विकास निधि को किस तरह से खर्च करना है, इस बारे में पार्टी को निर्देशित करने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा, "उनके पास मुझे निर्देशित करने का कोई अधिकार नहीं है। केवल जनता निर्देश दे सकती है क्योंकि यह उसका धन है। प्रशासनिक अधिकारियों जैसे जिलाधिकारी को इस पर निगरानी रखनी होती है।"

उन्होंने कहा, "कुछ पार्टी नेता विकास के कामों के लिए उनकी कोशिशों में बाधा डाल रहे हैं। मुझसे कहा गया कि 'आपको कुछ नहीं करना है, आपको केवल फाइल पर दस्तखत करना चाहिए।"

सुमन ने कहा, "लेकिन मैंने ऐसा करने से मना कर दिया। हो सकता है कुछ लोग पैसे बनाना चाहते हों। गैर सरकारी संगठनों की मार्फत जब मैंने परियोजनाओं का क्रियान्वयन आरंभ किया तो मेरे बारे में शिकायत की गई की मैं पार्टी को नजरअंदाज कर रहा हूं। मैंने जिस भी परियोजना को गैरसरकारी संगठनों की सहायता से आगे बढ़ाया, उसका परिणाम शानदार रहा। पार्टी द्वारा यह काम अच्छे तरीके से नहीं किया जा सकता।"

पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा कथित तौर अपमानित किए जाने के बाद सुमन ने सोमवार रात पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी को एक मोबाइल संदेश भेजकर पार्टी छोड़ने की इच्छा जताई थी।

बनर्जी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, "हाल ही में मेरे निर्वाचन क्षेत्र में एक कार्यक्रम था। इस दौरान कुछ युवा उनके पास पहुंचे और खेल के मैदान के लिए निधि जारी किए जाने की मांग की। बनर्जी ने मुझे नजरअंदाज करते हुए एक राज्यसभा सदस्य से अपने कोटे से राशि जारी करने को कहा। यह मेरे मुंह पर एक तमाचा था।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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