बुंदेलखंड से 22 हजार परिवारों का पलायन

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बांदा। उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड क्षेत्र के बांदा जनपद में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (महानरेगा) के तहत 82 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी श्रमिकों को पलायन नहीं रुक पाया है।

केन्द्र सरकार द्वारा संचालित मनरेगा बुंदेलखंड के बांदा जनपद के कामगारों को रोजगार दे पाने में असफल साबित हुई है। इस बात का खुलासा पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान के फरवरी एक सर्वेक्षण रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक 3,651 परिवारों के घरों में ताले लटके हैं, जबकि 18874 घरों में रखवाली हेतु वृद्धों को छोड़ कर बाकी सभी काम की तलाश में परदेश चले गए हैं। इस प्रकार काम की तलाश में परदेश जाने वाले कामगार परिवारों की संख्या 22525 है।

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अनुमान के मुताबिक 80 हजार से एक लाख मजदूर रोजी-रोटी की तालाश में अपना वतन छोड़ चुके हैं। जिनकी जुलाई-अगस्त में वापसी की संभावना है। अगस्त 2009 में यह संख्या 1214 थी। छह माह में 21311 परिवारों ने पलायन किया।

बांदा में क्षेत्रवार पलायित परिवारों का ब्यौरा इस प्रकार है। घरों में ताला लगा पलायन करने वाले परिवारों में नरैनी में 925, बबेरू में 197, जसपुरा में 163, महुआ में 489, जौरही में 286, बांदा शहर में 163, अतर्रा कस्बे में 109 व तिन्दवारी में 214 परिवार शामिल हैं। जो परिवार घर की रखवाली का जिम्मा बुजुर्गो पर छोड़ गए हैं, उनमें सबसे ज्यादा 3333 परिवार नरैनी से हैं। बबेरू में 2838, जसपुरा में 1387, महुआ में 1897, जौरही में 2287, बिसण्डा में 1858, कमासिन में 796, तिन्दवारी में 1669 बांदा शहर में 1459 व अतर्रा कस्बे में 361 घरों में एक बुजुर्ग के अलावा कोई नहीं है।

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बांदा के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) हीरामणि मिश्रा इस रिपोर्ट से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि लगभग दो हजार मजदूरों का ही महानगरों की ओर पलायन हुआ है। सीडीओ ने बताया, "मनरेगा में जॉब कार्ड धारक मजदूर को सिर्फ एक सौ दिन का काम दिया जा सकता है। शेष 265 दिन के रोजगार के लिए वह बाहर ही तो जाएगा।"

चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त ओ.पी. सिंह ने कहा, "भारी तादाद में हुए मजदूरों के पलायन की जांच कराएंगे।' इस जनपद में चालू वित्त वर्ष 2009-10 में मनरेगा के 82 करोड़ रुपए खर्च कर सिर्फ 20 हजार मानव दिवस सृजित हो सके हैं।"

विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पार्टी के विधायक सरकार व अधिकारियों की खाऊ -कमाऊ नीति को मजदूरों के पलायन के लिए जिम्मेदार मानते हैं। बबेरू क्षेत्र से सपा विधायक विश्वम्भर सिंह यादव का कहना है कि मनरेगा के धन से मजदूरों को काम तो नहीं दिया गया, पर अधिकारियों व बसपा नेता जरूर मालामाल हुए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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