'सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल' इस्लाम विरोधी

लखनऊ। लखनऊ में चल रहे ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अधिवेशन के आखिरी दिन जो चर्चा हुई उससे ये जाहिर होता है कि देश बड़े ही खामोश ढंग से एक के बाद एक मुसलमान विरोधी नीतियां बना रहा है। रविवार को बोर्ड के प्रवक्ता और सचिव ए.आर.कुरैशी ने जोरदार लहजे में सांप्रदायिक हिंसा विरोधी विधेयक का विरोध किया। उन्होने कहा कि प्रस्तावित विधेयक मुसलमानों के हित में नहीं है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने विधेयक को इस्लाम विरोधी बताया है। अधिवेशन में केंद्र सरकार से इसे वापस लेने की मांग की गयी। बोर्ड ने कहा कि इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद पुलिस को असीमित अधिकार मिल जाएंगे। बजाय पुलिस की जिम्मेदारी तय करने के उसको ज्यादा अधिकार देना उचित नहीं है। बोर्ड पुलिस को ज्यादा अधिकार दिए जाने वाले इस प्रस्तावित कानून का विरोध करता है।

कुरैशी ने कहा कि इतिहास गवाह रहा है कि दंगों के दौरान पुलिस की भूमिका मुसलमान विरोधी रही है। वैसे भी पुलिस को पहले ही इतने अधिकार मिले हुए हैं कि अगर उनका वह सही तरीके से इस्तेमाल करे तो कानून व्यवस्था बरकरार रह सकती है। कुरैशी ने मांग की कि इस विधेयक को वापस लिया जाए या फिर केंद्र सरकार इसके मसौदे को फिर से तैयार करे।

इसके अलावा बोर्ड ने भारत की इजरायल से बढ़ती निकटता पर भी चिंता जाहिर की। कुरैशी ने कहा कि भारत के इजरायल के साथ संबंध लगातार बढ़ रहे हैं। जबकि इजरायल शुरु से इस्लाम विरोधी राष्ट्र रहा है। ऐसे में भारत को उसके साथ अपने संबंधों पर फिर से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अरब देशों से संबंधों की कीमत पर इजरायल से दोस्ती न की जाए। इजरायल के साथ वैसे ही संबंध रखे जाएं जैसे जवाहरलाल नेहरू के समय थे।

साथ ही बोर्ड ने कथित दहशतगर्दी के नाम पर मुसलमान युवकों को निशाना बनाए जाने पर भी चिंता जाहिर की। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का तीन दिवसीय अधिवेशन रविवार को समाप्त हो गया। इसमें देशभर से मौलानाओं और मुस्लिम बुद्धजीवियों ने शिरकत की।

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