लालू के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित

Lalu Yadav
नई दिल्ली। पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद और उनकी पत्नी राबड़ी देवी को भ्रष्टाचार मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा बरी किए जाने को बिहार सरकार चुनौती दे सकती है या नहीं, सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन, न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा और न्यायमूर्ति बी.एस. चौहान की खंडपीठ ने दिनभर चली सुनवाई में विभिन्न पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। लालू प्रसाद और राबड़ी देवी पर अपने मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान वैध आय से अधिक संपत्ति जमा करने का आरोप है। दोनों ने लगभग 15 वर्षो तक बिहार में अलग-अलग राज किया था।

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चारा घोटाला मामले में वर्ष 1992 से 97 के दौरान राजकोष से अवैध तरीके से अरबों रुपये निकाए गए थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दोनों के खिलाफ वैध आय से अधिक धन जुटाने के लिए मामला दर्ज किया था।

सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश मुनि लाल पासवान ने हालांकि लालू और राबड़ी को 18 दिसंबर 2006 में इन आरोपों से बरी से कर दिया था। इसके बाद बिहार सरकार ने 2007 में इस फैसले को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती दी। सरकार ने कहा था कि लालू प्रसाद के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनता दल (राजद) केंद्र सरकार को समर्थन दे रहा था, इसीलिए सीबीआई दोनों को बरी किए जाने को चुनौती नहीं देना चाहती।

बिहार सरकार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील एल. नागेश्वर राव ने जोर देकर कहा कि इस मामले में सरकार को दोनों को बरी किए जाने को चुनौती देने का पूरा हक है। लालू प्रसाद की ओर से पेश हुए पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री राम जेठमलानी ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है, क्योंकि मामले की जांच सीबीआई ने की है।

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