'मुस्लिम, दलित, पिछड़ी महिलाओं को आरक्षण दें'

राज्यसभा में सोमवार को इस विधेयक को लेकर ज़बर्दस्त झड़पें हुई थीं और फिर मतदान टल गया था. हालात यहाँ तक पहुँच गए कि कुछ सांसदों ने उपराष्ट्रपति के टेबल से विधेयक संबंधी कागज़ात छीन कर फेंक दिए. इस विधेयक के तहत महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण करने का प्रावधान है.
लेकिन इसके विरोधी माँग कर रहे हैं कि इस विधेयक में मुस्लिम, दलित और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण दिया जाए. सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल के लालू यादव, समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह और जनता दल (यू) के शरद यादव प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिले. शरद यादव ने मीडिया को बताया, "इस विधेयक में मुस्लिम, पिछड़े और दलित वर्ग की महिलाओं का भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए. इसके लिए सभी दलों से बाचतीत होनी चाहिए. हम प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने हमें बुलाया और हमारी बात सुनी है."
राष्ट्रीय जनता दल के लालू यादव का कहना था, "इस बारे में कि प्रतिनिधित्व कितना हो, कोई बात नहीं हुई है. कोई प्रतिशत तय नहीं हुआ है. हम महिलाओं को आरक्षण दिए जाने के विरोधी नहीं हैं. हम केवल मुस्लिम, पिछड़ा और दलित वर्ग की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व दिए जाने के हक़ में हैं. ऐसा न होना कोई मामूली बात नहीं है. सभी पार्टियों के नेताओं को बुलाएँ, ऑल पार्टी मीटिंग होनी चाहिए." उल्लेखनीय है कि कांग्रेस, भाजपा और वामदलों ने इस बारे में अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है. उधर विधेयक का समर्थन कर रही भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की आलोचना की है और कहा है कि सत्तारुढ़ पार्टी विधेयक पारित ही नहीं करवाना चाहती है.
विधेयक का समर्थन कर रहे वाम दलों ने भी सरकार के रवैए की आलोचना करते हुए कहा है कि सरकार के पास संख्या बल है लेकिन उनके पास विधेयक पारित करवाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है. महिला विधेयक को लेकर इस तरह का विरोध पहली बार नहीं हुआ है. पिछले 13 वर्षों में जब कभी संसद में यह विधेयक आया है तो इसके विरोधियों राजद, सपा और जद (यू) के सांसदों ने काफ़ी उग्र प्रदर्शन किया है और विधेयक की प्रतियां फाड़ी थीं.












Click it and Unblock the Notifications