'पाक से बातचीत में विदेशी दबाव नहीं'

'पाक से बातचीत में विदेशी दबाव नहीं'

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना है कि पाकिस्तान से बातचीत के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है लेकिन पाकिस्तान को यह सुनिश्चित करना होगी कि वो अपनी ज़मीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए न होने दे.

मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान से विदेश सचिव स्तर की बातचीत का फ़ैसला पूरी तरह से सोचा समझा था और किसी दूसरे देश का दबाव नहीं था.

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के जवाब में मनमोहन सिंह ने कहा, "पाकिस्तान के बारे में भारत की नीति लगातार, सतर्क और यथार्थवादी है."

उनका कहना था,"शीतयु्द्ध के समय भी अमरीका और सोवियत संघ ने बातचीत का रास्ता खुला रखा था."

विपक्ष के उस आरोप पर कि पाकिस्तान से विदेश सचिव की बातचीत अमरीका के दबाव में हुई. मनमोहन सिंह ने कहा, "मैं विपक्ष से अनुरोध करुँगा कि संवेदनशील मामलों पर भ्रम न फैलाएं...हम दक्षिण एशिया में किसी विदेशी ताक़त का दख़ल नहीं चाहते."

ग़ौरतलब है कि बुधवार को लोकसभी में ही आडवाणी ने आरोप लगाया था कि भारत ने पाकिस्तान के साथ अमरीका के दवाब में बातचीत की है.

मध्यस्था की बात नहीं

मनमोहन सिंह ने इस बात को भी ख़ारिज कर दिया है उन्होंने पाकिस्तान से समस्याओं के हल के लिए सउदी अरब से मध्यस्थता की बात की है.

राष्ट्रपति के अभिभाषण के जवाब मनमोहन सिंह ने अनेक मुद्दों पर सरकार की नीतियों को स्पष्ट किया.

उन्होंने बांगलादेश से घुसपैठ के बारे में हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि बांग्लादेश ने भारत को आश्वस्त किया है वह अपनी भूमि का भारत के ख़िलाफ़ आतंकवादी गतिविधियों के इस्तेमाल नहीं होने देगा.

महिला आरक्षण विधेयक पर उन्होंने कहा कि यह विधेयक इसी सत्र में लाया जाएगा. उनका कहना था,"मैं सभी से सहयोग की अपील करता हूँ."

विदेशों में भारतीयों के कालेधन पर उनका कहना था कि सरकार ने 20 देशों से बात की है और इस सिलसिले में स्विट्ज़रलैंड से भी बात हुई है.

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