हॉलब्रुक ने अपने बयान पर अफसोस जताया (लीड-1)

हॉलब्रुक ने कहा, "मेरे बयान को लेकर हुए गलतफहमी को लेकर मुझे अफसोस है। काबुल में हुए आतंकवादी हमले में छह भारतीयों की जान गई और दूसरे देशों के भी 10 नागरिक मारे गए।"

उन्होंने कहा, "मैंने ऐसा नहीं कहा था कि भारतीयों को निशाना नहीं बनाया गया, परंतु शुरुआत में ऐसा लगा था कि भारतीय अधिकारी वहां निशाना नहीं थे।"

हॉलब्रुक ने कहा, "हम सभी जानते हैं कि भारतीय नागरिक आतंकवादियों के निशाने पर रहे हैं और अभी भी हैं। अफगानिस्तान में भी भारतीय आतंकवादियों के निशाने पर हैं। मुझे काबुल हमले में मारे गए सभी लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना है।"

उन्होंने कहा, "अफगानिस्तान के लोग और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भारत द्वारा किए जा रहे पुनर्निर्माण एवं मानवीय कार्यो की सराहना करते हैं।"

उल्लेखनीय है कि बीते मंगलवार को होलब्रुक ने कहा था, "इस हमले के बारे में मेरा मानना है कि यहां भारतीयों को निशाना नहीं बनाया गया था।"

हॉलब्रुक के इस ताजा बयान के आने के कुछ देर बाद ही भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन काबुल रवाना हुए। माना जा रहा है कि मेनन के इस दौरे के बाद हमले से जुड़ी जांच में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य हाथ लग सकते हैं। मेनन अपने काबुल प्रवास के दौरान अफगानी राष्ट्रपति हामिद करजई, विदेश मंत्री जालमे रसूल और अफगानिस्तान के अन्य शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे।

मेनन वहां मौजूद लगभग 4,000 भारतीयों की सुरक्षा की समीक्षा करेंगे। अफगानिस्तान में ज्यादातर भारतीय पुनर्निर्माण कार्यो से जुड़े हैं।

वैसे यहा पहला मौका नहीं है जब काबुल में भारतीयों निशाना बनाया गया है। इससे पहले जुलाई, 2008 और अक्टूबर, 2009 में काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर आतंकवादी हमले हुए थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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