मूल्य वृद्धि वापस लेने से प्रधानमंत्री के इंकार की माकपा ने आलोचना की
माकपा ने कहा कि जहां सरकार को आगामी वर्ष में डीजल और पेट्रोल पर सीमा और उत्पाद शुल्क से 25,000-30,000 करोड़ रुपये की आय की उम्मीद है वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने भी स्वीकार किया कि इसी दौरान आयकर में कटौती के कारण 26,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।
माकपा ने एक बयान में कहा, "प्रधानमंत्री अप्रत्यक्ष कर में वृद्धि को राजकोषीय मजबूती के नाम पर कैसे सही ठहरा सकते हैं जबकि उन्होंने प्रत्यक्ष करों में कटौती पर आंखें बंद कर रखी हैं।"
बयान में पूछा गया कि जनप्रिय नीतियां क्या हैं? अधिसंख्य लोगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले तेल पर अप्रत्यक्ष कर को कम करना या प्रोत्साहन के नाम पर एक वित्तीय वर्ष (2009-10) में निगम कर में 80,000 करोड़ रुपये की छूट देना।
माकपा ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह कहना कि तेल की बढ़ी हुई कीमतों का थोक मूल्य सूचकांक पर केवल 0.4 प्रतिशत भार बढ़ेगा, पूरी तरह गलत अनुमान है।
माकपा ने कहा कि जुलाई 2009 में अंतिम बार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ने के बाद अब तक महंगाई करीब 20 प्रतिशत बढ़ चुकी है। इस बार की बढ़ी हुई पेट्रोलियम कीमतों का परिणाम कमरतोड़ महंगाई होगी।
तेल की बढ़ी हुई कीमतों के प्रधानमंत्री द्वारा बचाव किए जाने को खारिज करते हुए माकपा ने डीजल और पेट्रोल पर बढ़े हुए उत्पाद कर को वापस लेने की मांग दोहराई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications