बुन्देलखंड में एक साल में 51 हजार बेरोजगार कम हुए
बुन्देलखंड के सात जनपदों बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी और ललितपुर के सेवा योजन कार्यालयों में बीते साल दो लाख छह हजार पांच सौ सरसठ शिक्षित बेरोजगार पंजीकृत थे। इनमें बांदा (चित्रकूट सहित) में 57602, हमीरपुर में 32029, महोबा में 14898, जालौन में 32463, झांसी में 49623 और ललितपुर में 19951 दर्ज थे, जो वर्ष 2010 के जनवरी माह में घटकर , एक लाख 55 हजार 97 रह गए।
इस प्रकार 51 हजार चार सौ सत्तर बेरोजगार कम हुए हैं। अब बांदा, चित्रकूट में 44829, हमीरपुर में 25311, महोबा में 11783, जालौन में 32463, झांसी में 49623 और ललितपुर में 19951 बेरोजगार रह गए हैं। क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी (झांसी) के. डी. शुक्ला का तर्क है कि 'वर्ष 2006 में प्रदेश सरकार पांच सौ रुपये प्रति माह भत्ता दे रही थी, परन्तु अब भत्ता बन्द हो जाने से लोग पंजीयन व नवीनीकरण में रुचि नहीं ले रहे।'
बुन्देलखंड का औद्योगिक विकास तो नहीं हुआ पर अचानक बेरोजगारों की संख्या घट जाना आश्चर्यजनक है। मनरेगा जाब कार्ड धारक शिक्षित बेरोजगार रज्जू प्रसाद का कहना है कि 'रोजगार न मिलने के कारण तमाम युवा परदेश चले गए हैं। पंजीयन का कोई मतलब नहीं है।'
त्रासदी भोग रहे बुन्देलखंड के औद्योगिक विकास के लिए पैकेज भी नाकाफी साबित हो रहें हैं। अब तक केन्द्र व राज्य सरकार ने भी ठोस कदम नहीं उठाया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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