सज्जन कुमार के खिलाफ नया वारंट, सीबीआई को फटकार (लीड-2)
वर्ष 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण कुमार और अन्य के खिलाफ नया गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। अदालत ने हालांकि एक मामले को बंद कर कुमार को राहत दी।
अतिरिक्त मुख्य महानगरीय दंडाधिकारी लोकेश कुमार ने सज्जन कुमार और अन्य के खिलाफ अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण गैर जमानती वारंट जारी किया। इन सभी को 10 मार्च को अदालत में पेश करने के लिए कहा गया है। अदालत ने 17 फरवरी को भी सज्जन कुमार और अन्य के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था।
अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कहा कि वह 10 मार्च को सज्जन कुमार और अन्य की अदालत में उपस्थिति को सुनिश्चित करे।
सज्जन कुमार को सिख विरोधी दंगे से जुड़े मंगोलपुरी मामले में अदालत से राहत मिली है क्योंकि पीड़िता हरविंदर कौर अदालत में उपस्थित नहीं हो सकी और मामले को बंद किए जाने पर भी उन्होंने कोई आपत्ति नहीं की।
सीबीआई के वकील ने अदालत में कहा कि सज्जन कुमार और अन्य को गिरफ्तार करने के लिए चार जगहों पर छापे मारे गए थे लेकिन गिरधारी लाल के अलावा किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया जा सका। लाल भी इस मामले में आरोपी है।
सीबीआई की इस दलील पर अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ठीक ढंग से काम नहीं कर रही है। अदालत ने कहा, "क्या यह किसी प्रमुख जांच एजेंसी के काम करने का तरीका है? रात में आरोपियों को पकड़ने की कोशिश क्यों नहीं की गई जब आवास में उनके रहने की सबसे अधिक संभावना होती है। इससे प्रतीत होता है कि सीबीआई जांच में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।"
सीबीआई द्वारा मामले के आरोपियों के फरार होने की बात कहने पर, सज्जन कुमार के वकील आई.यू.खान ने कहा, "हम फरार नहीं हैं। मैं कोई तथ्य छुपा नहीं रहा हूं और केवल अपने मुवक्किल की जमानत याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहा हूं।"
सीबीआई ने सज्जन कुमार और अन्य के खिलाफ दो मामलों में कथित तौर पर भीड़ को भड़काने के लिए आरोप पत्र दायर किया था।
उल्लेखनीय है 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे। दिल्ली में दंगे के दौरान 3,000 से अधिक सिख मारे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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