नेपाल में निराशा के बीच मनाया गया लोकतंत्र दिवस
काठमांडू, 19 फरवरी (आईएएनएस)। नेपाल ने शुक्रवार को अपने 59वें लोकतंत्र दिवस की वर्षगांठ मनाई। राणा राजवंश के एक शताब्दी से भी लंबे समय तक चले दमनकारी शासन के बाद नेपाल में लोकतंत्र आया था पर यहां जारी राजनीतिक गतिरोध के चलते लोगों में लोकतंत्र दिवस के प्रति कोई खास उत्साह नहीं देखा गया।
वर्ष 1951 में इसी दिन राणा शासन के खिलाफ चले एक लंबे संघर्ष के बाद नेपाल के तत्कालीन राजा त्रिभुवन अपने बेटे और उत्तराधिकारी महेंद्र और पौत्र बीरेंद्र के साथ भारत भाग गए थे। इस तरह राणा राजवंश का अंत हुआ और शाह वंश के राजाओं ने गद्दी संभाली।
इस दिन राजनीतिक दलों से प्रतिबंध हटा लिया गया था और इस दिन को लोकतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
गठबंधन सरकार ने लोकतंत्र दिवस कई तरह से मनाया। इस अवसर पर फांसी की सजा पाने वाले चार लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं की मूर्तियों पर माल्यार्पण किया गया लेकिन आम लोगों ने नेपाल टेलीविजन पर कहा कि मौजूदा नेता शहीदों के लक्ष्यों को पाने में असफल रहे हैं।
पिछले साल माओवादी सरकार के गिरने के बाद से आए राजनीतिक गतिरोध को दूर करने में नेपाल के बड़े राजनीतिक दल असफल रहे हैं।
माओवादी जब सत्ता में थे, उन्होंने सेना प्रमुख को बर्खास्त कर दिया था जिसे बाद में राष्ट्रपति राम बरन यादव ने बहाल कर दिया था। माओवादी अब राष्ट्रपति की भूमिका को लेकर संसद में बहस चाहते हैं लेकिन गठबंधन सरकार इसकी इजाजत नहीं दे रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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