नक्सलवाद से प्रभावित हुई है बच्चों की स्कूली शिक्षा
दोरनापल (छत्तीसगढ़), 17 फरवरी (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2005 से ही नक्सल प्रभावित जिलों के सैकड़ों स्कूली इमारतों पर नक्सलियों द्वारा बमों से हमला किए जाने की वजह से बच्चों की शिक्षा बुरी तरह से प्रभावित हुई है।
दंतेवाड़ा जिले में एक स्कूल में शिक्षक राजा तोरन ने आईएएनएस को बताया, "बस्तर में दूरदराज के इलाकों में शिक्षा और बच्चों का जीवन खासा प्रभावित हुआ है। इन इलाकों में नक्सलियों द्वारा स्कूली इमारतों को निशाना बनाए जाने से या फिर खतरे की वजह से शिक्षकों द्वारा कक्षाओं में पढ़ाने से इंकार किए जाने के कारण बच्चों की शिक्षा काफी प्रभावित हुई है।"
गौरतलब है कि राज्य के दक्षिण में स्थित और खनिज पदार्थो के मामले में धनी माना जाने वाला बस्तर क्षेत्र 40,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। वर्ष 2005 से अब तक 1,500 लोग यहां नक्सली हिंसा का शिकार हो चुके हैं और कम से कम 440 स्कूलों की इमारतों को नक्सली निशाना बना चुके हैं।
नक्सलियों के विरुद्ध जून 2005 में आरंभ सलवा जुडूम आंदोलन के बाद यदि आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करें तो बस्तर क्षेत्र में वर्ष 2005 से ही नक्सली हिंसा के चलते कम से कम 100,000 लाख बच्चे प्राथमिक शिक्षा से वंचित हुए हैं।
बस्तर, देश के उन पांच जिलों में शामिल है जिनमें नक्सली सबसे अधिक सक्रिय हैं। बस्तर के अलावा दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और कांकेर में नक्सली सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। सलवा जुडूम के सामने आने के बाद बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को स्कूली भवनों में तैनात किया गया।
दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक अमरेश मिश्रा ने कहा, " वास्तव में नक्सली हिंसा ने शिक्षा को प्रभावित किया है। दर्जनों स्कूल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हैं। अब इन स्कूलों को दूसरी जगह ले जाया जा रहा है ताकि उन्हें सुरक्षा मुहैया करवाई जा सके।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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