देश में बीटी बैंगन को फिलहाल अनुमति नहीं (लीड-2)
रमेश ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "बीटी बैंगन की व्यावसायिक खेती की तब तक अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक कि स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन जनता और पेशेवरों को इस मामले में संतुष्ट नहीं कर देता कि इसका मानव स्वास्थ्य पर और पर्यावरण पर कोई दीर्घकालिक कुप्रभाव नहीं होगा।"
रमेश ने इस मुद्दे पर देश के सात शहरों में आयोजित की गई जन सुनवाई के दौरान पर्यावरण कार्यकर्ताओं की ओर से, किसानों की ओर से और 11 राज्य सरकारों की ओर से जीन परिवर्धित इस फसल के खिलाफ उठाई गई आवाजों का जिक्र किया।
रमेश ने कहा, "यह निर्णय इस सूचना पर आधारित है कि वैज्ञानिक समुदाय में इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट आम राय नहीं है। पर्यावरण वैज्ञानिकों ने इतने प्रश्न खड़े किए हैं कि उनका कोई संतोषजनक जवाब नहीं है।"
रमेश ने कहा, " विभिन्न राज्यों में इस मुद्दे पर भारी विरोध भी सामने आए हैं। नकारात्मक जनभावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि बीटी बैंगन को मंजूरी देने की इतनी कोई जल्दी नहीं है।"
उन्होंने कहा, "बीटी बैंगन पर सावधानी पूर्वक कदम बढ़ाना मेरी जिम्मेदारी है। इसके मानव शरीर पर दीर्घकालीक असर के बारे में अध्ययन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।"
रमेश ने साफ किया कि इस रोक का अर्थ बीटी बैंगन की सशर्त स्वीकृति नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं यह कहना चाहूंगा कि इस रोक के लिए वैज्ञानिक समुदाय और समाज जिम्मेदार है।"
रमेश ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध महाराष्ट्र स्थित माहिको कंपनी द्वारा विकसित किए जा रहे बीटी बैंगन पर है। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (कोयमबटूर), धारवाड़ (कर्नाटक) स्थित कृषि विश्वविद्यालय के अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की दो प्रयोगशालाएं भी जीन परिवर्धित बैंगन विकसित कर रही हैं।
नकली बीटी बैंगन के बीजों के बाजार में आने की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा कि इस पर रोक लगाना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी होगी। उन्होंने कहा, "मैं उम्मीद करता हूं कि बीटी कॉटन जैसी स्थिति देखने को नहीं मिलेगी, जहां नकली और अनधिकृत बीटी कॉटन के बीज बाजार में प्रचलित हो गए।"
बीटी बैंगन पर निर्णय की घोषणा बुधवार को की जानी थी, लेकिन रमेश ने इसे एक दिन पहले ही घोषित कर दिया। इस मुद्दे पर देश भर में और राजनीतिक गलियारों में माहौल काफी गरम हो गया था। सरकार की जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रूवल कमेटी द्वारा पिछले वर्ष हरी झंडी दिखाए जाने के बाद कृषि मंत्री शरद पवार और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने बीटी बैंगन की व्यासायिक खेती का समर्थन किया था।
रमेश ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय एम.एस.स्वामीनाथन जैसे वरिष्ठ वैज्ञानिकों से सलाह लेने के बाद लिया है। उन्होंने कहा, "मैंने कई सारे वैज्ञानिकों से बातचीत की, लेकिन इस मामले में विज्ञान नाकाफी है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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