'न्याय में देरी से अराजकता पैदा होती है'
वकीलों के नामांकन के लिए यहां आयोजित एक कार्यक्रम में चौधरी ने कहा, "वकील संविधान के संरक्षक हैं और न्याय में देरी अराजकता को पैदा करता है।"
समाचार एजेंसी ऑनलाइन ने चौधरी के हवाले से कहा है, "सभ्य और बर्बर समाज के बीच का निर्णायक तत्व कानून का शासन ही है। जहां कानून का शासन नहीं होता, वहां सभ्य समाज नहीं होगा।"
वकीलों को झूठे मुकदमों से बचने की हिदायत देते हुए चौधरी ने कहा, "वकील और अदालत जनता को न्याय मुहैया कराने के लिए समान रूप से जिम्मेदार होते हैं।"
चौधरी ने आगे कहा, "ंसंविधान की व्याख्या करना अदालत का प्रमुख अधिकार है। न्यायिक प्रणाली सिर्फ एक सिद्धांत पर काम करती है, वह सिद्धांत है कानून का शासन।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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