भारत के धर्य का अमेरिका भी हुआ कायल (राउंडअप)
अमेरिका ने भारत को आगाह भी किया है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी इस उपमहाद्वीप में युद्ध भड़का सकते हैं।
मुंबई पर वर्ष 2008 में आतंकवादी हमले के बाद भारत के संयम की सराहना करते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट एम. गेट्स ने बुधवार को कहा कि यह सोचना 'तर्कसंगत नहीं' है कि एक अन्य आतंकवादी हमले का सामना होने पर भारत असीमित धैर्य रखेगा।
दो दिवसीय भारत दौरे पर आए गेट्स ने रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी से मुलाकात के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "मुंबई पर आतंकवादी हमले के बाद भारत ने महान संयम और राजनीतिक कौशल दिखाया। परंतु एक और हमले की स्थिति में भी ऐसा जारी रहना सवालों के घेरे में है। यह मान लेना तर्कसंगत नहीं होगा कि एक अन्य हमले के मामले में भारत का धैर्य कायम रहेगा।"
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने भारतीय नेतृत्व को एक अन्य आसन्न हमले के बारे में चेतावनी दी, गेट्स ने कहा कि वर्तमान समय में दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय है।
गेट्स ने कहा, "मेरा मानना है कि न केवल भारत और अमेरिका वरन अन्य शक्तियों के बीच भी इस समय बहुत नजदीकी सहयोग है। वे भी ऐसे हमलों के बारे में चेतावनी या ऐसी कोई योजना के बनने पर जानकारी देते हैं।"
उन्होंने आगाह किया कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी इस उपमहाद्वीप में युद्ध भड़का सकते हैं।
गेट्स ने कहा कि आतंकवादी संगठन पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के स्थायित्व के लिए खतरा हैं। गेट्स ने इन परिस्थितियों के मद्देनजर आतंकी खतरे को कम करने के लिए दक्षिण एशियाई देशों में व्यापक सहयोग का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा, "पूरे दक्षिण एशिया में आसन्न खतरे की गंभीरता को समझना जरूरी है। अफगानिस्तान व पाकिस्तान में ये आतंकी संगठन अलकायदा के बैनर तले सक्रिय हैं और अफगानिस्तान व पाकिस्तान में अलग-अलग तत्वों को इस्तेमाल कर हमलों की साजिश रच रहे हैं। भारत के खिलाफ हमले की साजिश रचने के लिए ये आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिल कर काम कर रहे हैं।"
गेट्स अपने दो दिवसीय दौरे पर मंगलवार को भारत पहुंचे। उन्होंने यहां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी और विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा से भी मुलाकात की है। वर्ष 2006 के बाद उनकी यह दूसरीीाारत यात्रा है।
अफगानिस्तान में पुननिर्माण के क्षेत्र में भारत की ओर से की जा रही मदद को गेट्स ने 'आदर्श' करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने नई दिल्ली और इस्लामाबाद द्वारा वहां चलाई जा रही परियोजनाओं में व्यापक पारदर्शिता बरतने का सुझाव भी दिया, ताकि आपस में कोई गलतफहमी न पैदा हो सके।
गेट्स ने अमेरिका और भारत के बीच दो सैन्य समझौतों की भी वकालत की। उन्होंने इन दोनों समझौतों को आगे बढ़ाने के लिए इसे गति देने की मांग की। ये समझौते हैं- लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट (एलएसए) और कम्युनिकेशंस, इंटरोपेराबिलिटी एंड सिक्यूरिटी मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (सीआईएसएमओए)।
यदि यह समझौता हो जाता है तो भारत और अमेरिका एक दूसरे के विमानों, जहाजों और कर्मियों को सामरिक समर्थन देने तथा संवेदनशील संचार उपकरणों के आदान-प्रदान को बाध्य होंगे।
गेट्स ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सीआईएसएमओए के तहत भारत को संवेदनशील संचार उपकरण प्रदान किए जाएंगे और भू-स्थानिक क्षेत्र में बुनियादी आदान प्रदान।
उन्होंने कहा, "इससे भारत को ही फायदा पहुंचेगा। उसके सैन्य बलों को उच्चस्तरीय उपकरण मिल सकेंगे।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई गेट्स की बैठक के दौरान भी यह मुद्दा उठा।
गेट्स ने कहा, "प्रधानमंत्री से एलएसए पर भी बातचीत हुई। मैंने प्रधानमंत्री से वादा किया है कि इस समझौते के संबंध में कागजी कार्रवाई आगे बढ़ाएंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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