असम के विद्रोही दोबारा आधार नहीं खड़ा कर सकते : थिनले

गेलेफू (भूटान), 20 जनवरी (आईएएनएस)। भूटान के प्रधानमंत्री जिग्मे वाई. थिनले ने बुधवार को यहां कहा कि भारत के पूर्वोत्तर इलाके के विद्रोही उनके देश में दोबारा अपना आधार नहीं खड़ा कर सकते। इसके साथ ही थिनले ने स्वीकार किया है कि माओवादी विद्रोहियों का खतरा बना हुआ है, लेकिन उनका देश उन्हें कुचलने में सक्षम है।

थिनले ने आईएएनएस के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "इस तरह का कयास लगाना गलत है कि पूर्वोत्तर भारत के विद्रोही भूटान में दोबारा अपना आधार खड़ा कर सकते हैं। खासतौर से जब से हमारे सुरक्षा बलों ने आतंकी समूहों को यहां से खदेड़ा है, तब से भूटान में कोई आतंकी गतिविधि नहीं है।"

थिनले ने कहा, "हमारी सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौकस है और इस बात को सुनिश्चित कराने के लिए हर उपाय किए जा रहे हैं कि जो अतीत में घटा था, वह दोबारा न घट सके।"

ज्ञात हो कि भूटान ने वर्ष 2003 में 'ऑपरेशन आल क्लीयर' शुरू किया था और युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा), नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) और कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (केएलओ) जैसे प्रतिबंधित विद्रोही संगठनों से संबंधित कम से कम 30 शिविरों को ध्वस्त कर डाला था।

उस अभियान में 20 से अधिक विद्रोही मारे गए थे। भारत और भूटान के बीच 643 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है।

थिनले ने स्वीकार किया कि माओवादियों का खतरा बना हुआ है। "माओवादियों का खतरा बना हुआ है और मैं समझता हूं कि इस तरह के खतरे सभी देशों में हैं। इस तरह की पार्टियों के अपने हित हो सकते हैं, लेकिन हमारे देश में उनके प्रयासों को आधार मिलने का कोई कारण नहीं है।"

थिनले भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम से सटे दक्षिणी भूटान के गेलेफू कस्बे में विकास और सुरक्षा मामलों के निरीक्षण के लिए नियमित दौरे पर आए हुए थे। वह इन दक्षिणी जिलों में अगले दो दिनों तक रहेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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