उप्र में महंगाई के खिलाफ सपा का आंदोलन, मुलायम गिरफ्तार (राउंडअप)
राज्य के कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, बरेली, इटावा, रायबरेली व अन्य जिलों में भी आंदोलन कर रहे हजारों सपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर कुछ देर बाद में छोड़ दिया गया।
लखनऊ में आंदोलन का मोर्चा खुद मुलायम सिंह यादव ने संभाला। वह सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर बीच सड़क में महंगाई, भ्रष्टाचार और बिगड़ी कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर मायावती सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए। गिरफ्तारी के बाद सैकड़ों समर्थकों सहित मुलायम को पुलिस लाइन भेजा गया, जहां कुछ घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया गया। इस दौरान मौके पर पुलिस के सभी आला अधिकारी मौजूद थे।
पुलिस लाइन से निकलने के बाद मुलायम ने संवाददाताओं से कहा कि लाठी, डंडा और गोली से सपा के आंदोलन को रोका नहीं जा सकता है। अभी तो यह शुरुआत है। उन्होंने कहा कि मायावती सरकार द्वारा लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश हो रही है, लेकिन सपा उसके मंसूबे पूरे नहीं होने देगी।
मुलायम का कहना था कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। उन्होंने कहा कि मायावती सरकार पूरी तरह से हिल गई है और प्रदेश में कानून का राज समाप्त हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन द्वारा सपा के प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की गई।
इससे पहले जैसे ही सुबह सपा कार्यकर्ता लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में इकट्ठा होना शुरू हुए, पुलिस ने रास्ते में उन्हें रोकना शुरू कर दिया। इससे सपा कार्यकर्ता उग्र हो गए और पुलिस से उनकी झ्झ्झड़प हुई। पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया और जवाब में आक्रोशित सपाइयों ने पुलिस पर पथराव किया। लाठीचार्ज में करीब 25 से ज्यादा कार्यकर्ता घायल हुए।
सपा के आंदोलन को देखते हुए पूरे लखनऊ में पुलिस और सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है। सपा मुख्यालय और मुलायम सिंह के आवास को मानो छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने आईएएनएस से कहा कि हमारे शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने के लिए पुलिस ने पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव को सुबह आवास से निकलने नहीं दिया गया। जैसे-तैसे वह आवास से निकलकर कलेक्टरेट परिसर में धरना देने जा रहे थे कि उन्हें हजरतगंज चौराहे पर रोका गया, जिसके बाद वह वहीं पर धरने पर बैठ गए। पार्टी मुख्यालय आ रहे कई नेताओं को रास्ते में ही हिरासत में ले लिया गया।
उन्होंने दावा किया कि पूरे प्रदेश में 50 हजार से अधिक पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और 7,000 से ज्यादा सपाइयों को हिरासत में लिया गया। पुलिस के बर्बर लाठीचार्ज में सैकड़ों कार्यकर्ता घायल हुए। अकेले लखनऊ में पुलिस की लाठियों से 100 से ज्यादा सपाइयों को चोटें आईं हैं।
राज्य के अपर कैबिनेट सचिव विजय शंकर पांडे ने लखनऊ में संवाददाताओं से बातचीत में पुलिस द्वारा मुलायम सिंह यादव को घर से न निकलने दिए जाने के आरोप को गलत बताया। पांडे ने कहा कि सपा के प्रदर्शन को देखते हुए शांति और कानून-व्यवस्था न बिगड़ने पाए, यह सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
सपा के सभी बड़े नेता प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यकर्ताओं के साथ सड़कों पर उतरे। कानपुर में सपा के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव, बरेली में नेता प्रतिपक्ष शिवपाल सिंह यादव और इलाहाबाद में वरिष्ठ समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र ने आंदोलन की अगुवाई की। यहां भी इन नेताओं को हिरासत में लेने के बाद रिहा कर दिया गया। इन इलाकों में भी सपाइयों और पुलिस के बीच हिंसक झ्झड़पें हुईं।
राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) बृजलाल ने लखनऊ में संवाददाताओं को बताया कि सपा के करीब सात हजार प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर बाद में रिहा कर दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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