कामरेड ज्योति बसु को लाखों लोगों ने दी अश्रुपूर्ण विदाई (राउंडअप)
हसीना और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति एच.एम. इरशाद के अलावा वहां के कई मंत्री वाम नेता बसु को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उनकी अगवानी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने की।
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी की ओर से भी बसु को पुष्पांजलि अर्पित की गई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी बसु को श्रद्धांजलि दी। उनके साथ केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी भी थे।
पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी बसु को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। बसु के अंतिम दर्शन करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए माकपा के महासचिव प्रकाश करात, पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा के मुख्यमंत्रियों और माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्यों के साथ मौजूद थे।
इसके अलावा के भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू सहित कई बड़े राजनेता भी दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
वेनेजुएला के वामपंथी नेता व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज की तरफ से भारत में वेनेजुएला के राजदूत ने बसु को श्रद्धांजलि दी।
बसु एक जन नेता थे और इसकी एक बानगी उनकी अंतिम यात्रा के दौरान फिर दिखी। लाखों की संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन को सड़कों पर उमड़ पड़े और उन्होंने अपने प्रिय नेता को अश्रुपूर्ण विदाई दी।
बसु की अंतिम यात्रा सुबह 7.30 बजे आरंभ हुई। उनका पार्थिव शरीर लाल ध्वज में लिपटा हुआ था। सबसे पहले उनके शव को अंतिम दर्शन के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के अलीमुद्दीन स्ट्रीट स्थित राज्य मुख्यालय लाया गया।
कोलकाता के अलीमुद्दीन स्ट्रीट इलाके में स्थित माकपा के मुख्यालय पर दिवंगत वाम नेता का पार्थिव शरीर पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। हर तरफ 'लाल सलाम' और 'ज्योति बाबू अमर रहे' जैसे नारे सुनाई दिए।
बसु का पार्थिव शरीर शव गृह से दो किलोमीटर की यात्रा के बाद अलीमुद्दीन स्ट्रीट ले जाया गया। अंतिम यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में लोग अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन के लिए उमड़े। कोलकाता पुलिस के जवान और तीन पायलट कारें बसु की अंतिम यात्रा में साथ थीं।
पूरा अलीमुद्दीन स्ट्रीट इलाका लाल झंडों और बैनरों से पटा पड़ा था। बैनरों पर रवींद्रनाथ टैगोर की कुछ रचनाओं के अंश अंकित थे। इलाके में सड़क के दोनों ओर माकपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने मानव श्रृंखला बना रखी थी।
तकरीबन नौ घंटे तक चली अंतिम यात्रा समाप्त होने के बाद बसु को बंदूकों की सलामी दी गई। इसके बाद उनके शव को एसएकेएम अस्पताल ले जाया गया और उसे अस्पताल प्रशासन को सौंप दिया गया।
अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए लोग विभिन्न इलाकों से यहां पहुंचे थे। मजरहाट से पहुंचे बिमल बोस ने आईएएनएस से कहा, "मैं इस महान शख्स के अंतिम दर्शन के लिए सुबह ही यहां पहुंच गया था। वह हमारे नेता थे।"
गौरतलब है कि वर्ष 1977 से 2000 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे बसु का रविवार को निधन हो गया था। वह 95 वर्ष के थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*












Click it and Unblock the Notifications