नया अनुसंधान त्वचा कैंसर के इलाज में मददगार
वाशिंगटन, 18 जनवरी (आईएएनएस)। त्वचा कैंसर के ज्यादातर मामलों में इलाज संभव होता है लेकिन इसके लिए शल्य चिकित्सा करना पड़ती है जो दर्दनाक होने के साथ-साथ त्वचा पर निशान छोड़ जाती है। नए अध्ययन में इलाज का एक ऐसा नया तरीका ढूंढ़ा गया है जिसमें कैंसर की गांठें वहीं सिकुड़ जाएंगी।
लोयोला यूनीवर्सिटी शिकागो स्ट्रिट्च स्कूल ऑफ मेडीसिन (एलयूसीएसएसएम) की वरिष्ठ अध्ययनकर्ता मिशैल डेनिंग का कहना है कि दवाएं त्वचा कोशिकाओं में कैंसर की वृद्धि रोकने के लिए एक जीन पर काम करती हैं। लोयोला यूनीवर्सिटी हेल्थ सिस्टम (एलयूएचएस) ने यह अध्ययन किया था।
अमेरिका में हर साल 10 लाख से अधिक लोग त्वचा कैंसर के शिकार होते हैं।
एलयूएचएस के शोधकर्ताओं ने एक प्रकार के त्वचा कैंसर स्क्वेमस सेल कार्सिनोमा पर परीक्षण किया था। इसके हर साल 200,000 से 300,000 मामले सामने आते हैं।
स्क्वेमस सेल कार्सिनोमा त्वचा की ऊपर सतह इपिडर्मिस में शुरू होता है। ज्यादातर मामलों में यह कैंसर त्वचा के उन हिस्सों में होता है जो धूप के संपर्क में रहते हैं। इनमें चेहरा, कान, गर्दन, होंठ और हाथों का पिछला हिस्सा शामिल हैं।
धूप से त्वचा कोशिकाओं का डीएनए क्षतिग्रस्त हो सकता है। डीएनए की क्षति की प्रतिक्रिया में एक प्रोटीन काईनेस सी (पीकेसी) सक्रिय हो जाता है। यदि क्षति बहुत अधिक हो और डीएनए की मरम्मत संभव न हो तो पीकेसी प्रोटीन कोशिका को मृत्यु की ओर निर्देशित करता है।
स्क्वेमस सेल कार्सिनोमा में पीकेसी जीन काम करना बंद कर देता है और कोशिकाएं अपने क्षतिग्रस्त डीएनए की मरम्मत किए बिना विभाजित होती रहती हैं। जिसके परिणामस्वरूप नई कोशिकाओं का ट्यूमर बन जाता है।
एलयूसीएसएसएम की विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रोटीन काइनेस इनहिबीटर्स दवाओं से पीकेसी जीन दोबारा सक्रिय होता है और ट्यूमर वहीं सिकुड़ जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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