एक मिनट पीछे हुई कयामत की घड़ी

समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक 1947 में परमाणु वैज्ञानिकों ने इस घड़ी को दुनिया के भावी विनाश को दर्शाने के लिए विकसित किया था। दरअसल, यह प्रतीकात्मक घड़ी है जो दुनिया को कयामत का समय नजदीक आते जाने की चेतावनी देती है।
एक साथ कई कोशिशें जारी
'बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स' जिससे 19 नोबल पुरस्कार विजेता जुड़े हैं, में कहा गया है, "1945 में हुए पहले एटमी हमलों के बाद यह पहला मौका है जब दुनिया के परमाणु संपन्न देश एटमी हथियारों का जखीरा सीमित करने और सभी परमाणु सामग्रियों की सुरक्षा को लेकर इतने संजीदा हुए है।"
इसमें आगे कहा गया है, "यह पहला मौका है जब दुनिया को सुरक्षित बनाए रखने के लिए एक साथ कई मोर्चो पर कोशिशें तेज हुईं। विकसित और विकासशील देश जलवायु परिवर्तन की ज्वलंत समस्या से निपटने के लिए एक मंच पर आए हैं। अगर ऐसा नहीं हो तो यह दुनिया वाकई रहने योग्य नहीं रह जाएगी।" इस घड़ी के 64 वर्षो के इतिहास में इसमें महज 18 बार संशोधन किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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