शांति सम्मेलन में अशांति

शांति सम्मेलन में अशांति

दिव्या आर्या

बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

भारत की राजधानी दिल्ली में हो रहे भारत-पाकिस्तान शांति सम्मेलन में सोमवार को कश्मीर के मुद्दे पर हंगामा हो गया.

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता यासीन मलिक जब इस सम्मेलन में बोलने के लिए उठे, तब कश्मीरी पंडितों के संगठन पनुन कश्मीर के सदस्यों ने विरोध करना शुरू कर दिया. हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने दो कश्मीरी पंडितों को गिरफ्तार किया जिसके परिणामस्वरूप सम्मेलन में कश्मीर के मुद्दे पर बातचीत शुरू होने से पहले ही रोक देनी पड़ी.

मंच पर अपनी बात रखने के लिए आए थे पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता यासीन मलिक.

हंगामा अलगाववादी नेता यासीन मलिक जब इस सम्मेलन में बोलने के लिए उठे, तब विरोध में कश्मीरी पंडितों के संगठन पनुन कश्मीर के कई सदस्यों ने हंगामा करना शुरू दिया.

अलगाववादी नेता यासीन मलिक जब इस सम्मेलन में बोलने के लिए उठे, तब विरोध में कश्मीरी पंडितों के संगठन पनुन कश्मीर के कई सदस्यों ने हंगामा करना शुरू दिया.

कश्मीरी पंडितों का आरोप था कि यासीन मलिक भारत के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने के काम करते रहे हैं और उन्हें इस मंच पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है.

एक कश्मीरी पंडित आदित्य कौल का कहना था, "भारत-पाक शांति सम्मेलन हो रहा है और कश्मीर के मूल निवासी- कश्मीरी पंडितों को ही इसमें नहीं बुलाया गया. बल्कि यासीन मलिक जो एक आतंकवादी, बलात्कारी और हत्यारा है, वो इस सम्मेलन में शांति के बारे में बोल रहा है."

इस पर यासीन मलिक का कुछ यूँ कहना था, "फ़ोरम में सब लोग अपनी बात रखें, ये सही है, लेकिन ये लोग तो सिर्फ़ शोर मचाने और गाली गलौज करने आए थे."

अफ़सोस वहीं सम्मेलन के आयोजकों ने ये स्वीकार किया कि वो कश्मीर के मुद्दे पर सभी संगठनों को सम्मेलन में नहीं बुला पाए.

वहीं सम्मेलन के आयोजकों ने ये स्वीकार किया कि वो कश्मीर के मुद्दे पर सभी संगठनों को सम्मेलन में नहीं बुला पाए.

उन्होंने अफ़सोस जताया कि कश्मीरी पंडितों को अपनी बात इतने आक्रामक तरीके से रखनी पड़ी.

आयोजकों में से एक कमला भसीन का कहना था, "हमारी तरफ से कुछ ख़ामियाँ रह गईं. हमें कश्मीरी पंडितों की आवाज़ को पहले से ही स्थान देने की योजना बनानी चाहिए थी. हमने कोशिश की थी, फोन भी किए, पर वो हमें मिले नहीं."

राजधानी दिल्ली में तीन दिन का ये शांति सम्मेलन रविवार को शुरू हुआ था.

सम्मेलन में मुंबई में नवंबर 2008 में हुए हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच शांति-वार्ता फिर से शुरू करने की वकालत की जा रही है.

भारत और पाकिस्तान के जाने-माने लोग इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं जिनमें असमा जहाँगीर, एहतेजाज़ अहसान, कुलदीप नैयर और मुचकुंद दुबे जैसे नाम शामिल हैं.

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