निठारी हत्याकांड : सर्वोच्च न्यायालय से कोली को मिली राहत (राउंडअप)
पीड़ितों के अभिभावकों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से अब इस मामले के सह अभियुक्त और कोहली के मालिक मोनिंदर सिंह पढेर की तरफ मुकदमे का रुख होगा।
19 दिसम्बर, 2006 में नोएडा के निठारी इलाके में रिम्पा सहित 19 बच्चों के कंकाल बरामद होने के बाद हड़कंप मच गया था। ये कंकाल कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी डी-5 के पीछे से बरामद किए थे। इस मामले में एक अदालत ने पंढेर के नौकर कोली को बीते साल फरवरी में मौत की सजा सुनाई थी।
प्रधान न्यायधीश न्यायमूर्ति के. जी. बालकृष्णन और न्यायमूर्ति बी. एस. चौहान की खण्डपीठ ने कोली को राहत देने के साथ ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया।
फरवरी, 2009 में सीबीआई की विशेष अदालत ने रिम्पा हालदार मामले में कोली और पंढेर दोनों को मौत की सजा सुनाई थी। परंतु सितम्बर, 2009 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पंढेर को इस मामले में बरी कर दिया।
सीबीआई ने हत्या, अपहरण और दुष्कर्म से जुड़े कुल 19 मामलों में 16 चार्जशीट दायर की थी और सभी की सुनवाई अलग-अलग की जा रही है। कोली को सभी मामलों में आरोपी बनाया गया था जबकि पंढेर पर सिर्फ छह मामले दर्ज किए गए थे।
बहुचर्चित निठारी हत्याकांड के पीड़ित परिवारों की पैरवी कर रहे एक वकील खालिद खान ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गुरुवार को सुरिंदर कोली की मौत की सजा पर रोक लगाने का स्वागत किया है।
पीड़ित परिवारों के वकील खालिद खान ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से इलाहाबाद उच्च न्यायालय की वह 'त्रुटि' भी उजागर हो जाएगी जब उसने कोली के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी किया था। सितम्बर, 2009 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पंढेर को इस मामले में बरी कर दिया था।
खान ने आईएएनएस से कहा, "यह बहुत अच्छा फैसला है।. इससे पीड़ित परिवारों को फायदा होगा क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय अब उच्च न्यायालय और निचली अदालत के समक्ष पेश किए गए सबूतों का फिर से आकलन करेगा।"
उन्होंने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला निर्णायक होगा और हमें उम्मीद है कि दोनों दोषियों (पंढेर और कोली) को समान सजा मिलेगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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