सरकार में उच्च स्तर तक पहुंच गया है भ्रष्टाचार : सतर्कता आयुक्त
भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाली देश की सर्वोच्च संस्था ने कहा, "यदि किसी मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल है तो सरकार के विभिन्न एजेंसियों में मामलें को तेजी से बढ़ाने में निश्चित तौर पर परेशानी होती है। इस कारण देरी होती है। हमें जांच के लिए जरूरी सभी सूचनाओं को हासिल करने में अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है।"
सिन्हा ने कहा कि भ्रष्टाचार की प्रकृति बदल गई है और यह शीर्ष स्तर तक पहुंच गया है।
समाचार चैनल सीएनएन-आईबीएन को दिए एक साक्षात्कार में सिन्हा ने कहा, "पहले हम विकेंद्रीकृत भ्रष्टाचार देखने के आदी थे जिसका मतलब निचले स्तर पर भ्रष्टाचार से है। आज, भ्रष्टाचार सरकारी खरीद के बड़े मामलों और उच्च स्तर पर विभिन्न सेवाओं में देखने को मिलता है।"
उन्होंने कहा, "पेट्रोलियम, नागरिक उड्डयन, बिजली जैसे ताकतवर मंत्रालय आज बड़े कारपोरेट घरानों से सीधे सौदेबाजी कर रहे हैं। यह भारत में नई बात है।"
रुचिका गिरहोत्रा मामले का जिक्र करते हुए सिन्हा ने कहा, "पद का दुरुपयोग करने वाले को किसी भी कीमत पर बचाना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "एक व्यक्ति व्यवस्था के साथ रहते क्या कर सकता है और बच सकता है उसका यह एक बहुत खराब उदाहरण है। दुर्भाग्यवश हमारे पास नियम और कानून हैं लेकिन उसे कड़ाई से लागू नहीं किया जाता। अगर सरकार कानून लागू करने में गंभीरता दिखाए तो ऐसी घटनाएं नहीं घटित होंगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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