मुहर्रम: नम आंखों से याद किए गए कर्बला के शहीद

Muharram Procession
नई दिल्ली। मुहर्रम के मौके पर सोमवार को देश भर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जगह-जगह जुलूस निकाल कर और मातम के जरिए हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के अन्य शहीदों की याद में गम का इजहार किया।

लखनऊ संवाददाता के मुताबिक मुहर्रम की 10वीं तारीख को राजधानी सहित पूरे उत्तर प्रदेश में मुहर्रम का पर्व पारंपरिक ढंग से मनाया गया। अकीदतमंदों ने ताजिया और मातमी जुलूस निकालकर अपने गम का इजहार किया। पूरे प्रदेश में मुहर्रम के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े प्रंबंध किए गए थे।

लखनऊ के अलग-अलग इलाकों चौक, याहियागंज, ऐशबाग, हजरतगंज और आलमबाग में लोग नम आंखों से कर्बला के शहीदों की याद में जुलूस निकालकर अपना दुख बयान किया। प्रदेश के दूसरे शहरों इलाहाबाद, वाराणसी, अलीगढ़, मुरादाबाद, मेरठ और कानपुर में भी लोगों ने मातमी जुलूस और ताजिया निकाला।

कठिन दौर में भी अल्‍लाह पर भरोसा रखें

लखनऊ में चौक स्थित एक प्राचीन मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद मियां आब्दी ने संवाददाताओं से कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अपने कुनबे और साथियों के साथ मैदान-ए-कर्बला में शहीद होना कबूल किया लेकिन वसूलों के लिए सच्चाई और हक के रास्ते को नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा, "मुहर्रम का दिन हमें उनकी शहादत की याद दिलाता है और कठिन दौर में भी अल्लाह पर भरोसा करते हुए नेक राह पर चलने का पैगाम देता है।"

दक्षिण भारत के प्रमुख शहर हैदराबाद में मुहर्रम पूरे पारंपरिक ढंग से मनाया गया। पुराने शहर में हजारों की संख्या में लोग एकत्र हुए और जुलूस में हिस्सा लिया। शिया समुदाय के लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र किया। हैदरबाद के अलावा देश की राजधानी दिल्ली में मुहर्रम मनाया गया और लोगों ने विभिन्न स्थानों पर ताजिया निकाली।

बिहार में कड़ी सुरक्षा के बीच जुलूस

बिहार में मुहर्रम के मौके पर विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जुलूस निकाला और मातम किया। इस दौरान जुलूस में शामिल लोगों मर्सिया पढ़ा। पटना के गोलघर, अफजलपुर, फुलवारीशरीफ , गोलखपुर और शाहगंज सहित कई क्षेत्रों से ताजिया लिए लोग जुलूस की शक्ल में निकले और कर्बला तक गए।

पटना के अलावा पूर्णिया, किशनगंज, औरंगाबाद, कटिहार समेत सभी जिलों में मुहर्रम शांतिपूर्ण ढंग से मनाये जाने की खबर है। मुहर्रम के मौके पर पटना में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। प्रशासन ने पूर्व में ही जुलूस में ऊंट, हाथी, घोड़े को शामिल करने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

भाईचारे और सद्भाव का संदेश देने वाले इस पर्व पर मध्य प्रदेश में भी जगह-जगह मातमी जुलूस के साथ सैकड़ों की तादाद में ताजियों की सवारी निकाली जा रही थी। भोपाल में एक ताजिया ऐसा भी है जो पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक बनाने का काम कर रहा है।

भोपाल के बरखेड़ी इलाके में रहने वाले सलीम खान ने औरों से हटकर ताजिया बनाया है जो पूरी तरह सरसों की मदद से बनाया गया है। इसे प्राकृतिक स्वरूप देने की कोशिश की गई है। इस तरह का ताजिया बनाने के पीछे उनका मकसद लोगों में पर्यावरण के प्रति जागृति लाना है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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