भारत के लिए निर्मित रूसी परमाणु पनडुब्बी का अंतिम परीक्षण पूरा

समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के अनुसार आठ नवंबर 2008 को जब नेरपा समुद्री परीक्षण के लिए गई तो उसकी अग्निशमन प्रणाली से जहरीली गैस के रिसाव से शिपयार्ड के 17 कर्मचारियों की मौत हुई थी। उस समय पनडुब्बी में 81 नैसैनिकों के साथ कुल 208 लोग सवार थे।

इसके बाद 6.5 करोड़ डॉलर की लागत से हुई मरम्मत के बाद पनडुब्बी अंतिम समुद्री परीक्षण के लिए गई।

एक आधिकारिक सूत्र ने कहा कि सभी परीक्षणों के परिणामों का परीक्षण करने के बाद एक सरकारी आयोग ने कहा कि पनडुब्बी रूसी नौसेना में शामिल किए जाने के लिए तैयार है।

पनडुब्बी को देर सोमवार आधिकारिक रूप से रूसी नौसेना में शामिल किया जाएगा। इसके बाद इसे भारतीय नौसेना को पट्टे पर दिया जाएगा। भारत ने 12,000 टन की नेरपा के-152 पनडुब्बी को 10 वर्ष के पट्टे पर लेने के लिए 65 करोड़ डॉलर का भुगतान किया है।

अकुला-2 श्रेणी की इस पनडुब्बी को रूस की सभी परमाणु पनडुब्बियों में सबसे तेज और घातक माना जाता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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