माओवादियों ने भारत से सेना प्रमुख के बयान पर स्पष्टीकरण मांगा
काठमांडू, 28 दिसम्बर (आईएएनएस)। भारतीय थल सेनाध्यक्ष की एक टिप्पणी को नेपाल के आतंरिक मामलों में 'बेशर्म हस्तक्षेप' बताते हुए सत्ता में वापसी का प्रयास कर रहे नेपाली माओवादियों ने भारत सरकार से अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नेपाल के सेनाध्यक्ष छत्रमान सिंह गुरुं ग के हाल के भारत दौरे के दौरान भारतीय सेनाध्यक्ष दीपक कपूर ने कहा कि माओवादी गुरिल्लाओं का नेपाली सेना में विलय नहीं होना चाहिए। इससे नेपाल की सेना का राजनीतिकरण बढ़ेगा।
माओवादी पार्टी के प्रमुख और नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' ने भारतीय राजदूत राकेश सूद से मनमोहन सिंह सरकार को यह संदेश देने को कहा कि उनकी पार्टी जानना चाहती है कि सेनाध्यक्ष के बयान को उनका समर्थन हासिल है या नहीं।
एक सार्वजनिक सभा में नेपाल की सत्ताधारी पार्टियों को भारत की कठपुतली बताने के पांच दिन बाद रविवार को प्रचंड ने सूद से मुलाकात की।
नेपाल के वर्तमान घटनाक्रम से साउथ ब्लॉक को अवगत कराने के लिए सूद नई दिल्ली रवाना हो गए हैं।
तीन वर्ष पहले नेपाल की सत्ताधारी पार्टियों के साथ पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सदस्यों को राष्ट्रीय सेना में शामिल करने की शर्त पर शांति समझौता करने वाले माओवादियों ने कपूर के बयान की निंदा की।
इसी मुद्दे पर सेनाध्यक्ष रुक्मांगद कटवाल को बर्खास्त करने का प्रयास करने वाली आठ महीने पुरानी माओवादी सरकार को मई में सत्ता गंवानी पड़ी। राष्ट्रपति रामबरन यादव के हस्तक्षेप से कटवाल को हटाने का प्रयास विफल हो गया।
माओवादी पार्टी के प्रवक्ता दीनानाथ शर्मा ने प्रचंड के हवाले से कहा, "भारतीय सेनाध्यक्ष का बयान शांति समझौते का उल्लंघन है। इससे नेपाल की संप्रभुता प्रभावित हो सकती है। यदि यह सत्य है तो हम भारत के खिलाफ आंदोलन आरंभ करने को बाध्य होंगे।"
शर्मा ने कहा कि प्रचंड ने सूद को भारतीय जनरल की टिप्पणी पर उनकी पार्टी की आपत्ति भारत सरकार तक पहुंचाने और यह कहने को कहा कि भारत को नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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