्रपीढ़ियों से संजो रखी है सोने की 300 साल पुरानी कुरान
लखनऊ, 22 दिसम्बर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के हामिद परिवार को अपनी सोने की पुश्तैनी कुरान पर गर्व है और हो भी क्यों न अब तो केंद्र सरकार ने भी उसकी पहचान महत्वपूर्ण पांडुलिपि के रूप में की है।
यह कोई साधारण कुरान नहीं, यह 300 साल पुरानी सोने की कुरान है, जिसको जौनपुर शहर के रहट्टा मुहल्ले में रहने वाला हामिद परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी संजोते आ रहा है।
परिवार के मुखिया साजिद हमीद (55) ने आईएएनएस से कहा कि हमें आज फक्र है कि हमारी अनोखी सुनहरी कुरान को सरकार की तरफ से भी अहिमयत मिली है। हमारे जिले में ये तो पहले से ही सालों से ही चर्चा का विषय बनी रही है।
इस कुरान का आकर्षण उसकी सोने की जिल्द है। 1756 पन्नों वाली कुरान में जहां जिल्द सोने की बारीक कलाकृतियों से गढ़ी हुई है, वहीं इसके पóो सोने के पत्ती के रूप में हैं। हामिद परिवार के मुताबिक पांच पीढ़ियों से उन्होंने यह कुरान संजोकर रखी है। साजिद के दादा वाजिद अली को यह उनके दादा से मिली थी और तब से पीढ़ी दर पीढ़ी हम लोग इसे संजोते आ रहे हैं।
साजिद के अनुसार उनके परिवार की कोई एक मन्नत पूरी होने पर उनके पूर्वजों ने अल्लाह के लिए अपनी मोहब्बत जाहिर करने के लिए विशेष कारीगरों द्वारा ये कुरान बनवाई थी। अपने पूर्वजों से मिली कुरान का रखरखाव के लिए साजिद खास ध्यान देते हैं। सिर्फ इसी कुरान के लिए एक पारदर्शी आलमारी बनवाई है, जिसमें इसको रखा है। पढ़ने के लिए वो इसको नहीं निकालते क्योंकि उनका मानना है कि रोज खोलकर पढ़ने से इस कुरान के पन्नों को नुकसान पहुंच सकता है।
वह कहते हैं कि मैं इसको किसी भी हाल में खोना नहीं चाहता है। यह मेरे पूर्वजों की पहचान है। मैंने अभी से अपने बेटे को सख्त हिदायत दे दी है कि मेरे न रहने पर इस कुरान को मेरी याद सझकर उसी तरह संजोकर मिसाल कायम करेगा, जो हमारा परिवार वर्षो से करता आ रहा है।
साजिद के मुताबिक कुछ समय पहल केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने जिला प्रशासन से संपर्क साधा जिसके बाद कुछ अधिकारी मुझ्झसे मिलने आए। उस समय मुझ्झे बताया गया कि सरकार ने इसकी पहचान महत्वपूर्ण पांडुलुपि के रूप में की है और वह जब चाहेगी इस धरोहर को अपने संरक्षण में ले सकती है। अनोखी सुनहरी कुरान को रखने के लिए हामिद परिवार की वर्षो से केवल मुहल्ले ही नहीं पूरे जौनपुर में चर्चा होती है। उसे देखने के लिए लोगों को तांता लगा रहता है।
पड़ोसी तौफीक अहमद कहते हैं कि हम लोगों को इस बात का फक्र है कि ऐसी नायाब चीज हमारे शहर में मौजूद है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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