संसद की कैंटीन में खाद्य महंगाई का कोई असर नहीं
सरवर काशनी
नई दिल्ली, 20 दिसम्बर (आईएएनएस)। आवश्यक वस्तुओं की महंगाई के इस जमाने में क्या आप 12.50 रुपये में शाकाहारी थाली या 1.50 रुपये में एक कटोरी दाल या एक रुपये में एक रोटी मिलने की कल्पना कर सकते हैं।
जी हां संसद भवन की कैंटीन में यह संभव है, भले ही भोजन देश में गरीबों की पहुंच से दूर होता जा रहा है।
संसद भवन में कई भोजन इकाइयों का संचालन भारतीय रेलवे के हाथ है। इनमें पुस्तकालय और एनेक्सी में स्थित कैंटीन भी शामिल हैं। यहां दशकों से कीमतों वैसी हैं लेकिन नए व्यक्ति को शायद ही यह हजम हो।
बढ़ती महंगाई के खिलाफ सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने वाले सांसदों को निश्चित रूप से सस्ता खाना मिलता है। परंतु याद रहे यह सुविधा केवल सांसदों के लिए ही नहीं है। संसद के कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और मान्यता प्राप्त पत्रकार भी इस सुविधा का लाभ उठाते हैं, वहीं आम आदमी इन कीमतों के बारे में सोच भी नहीं सकता।
कीमतों का नमूना तो देखिए-दाल, सब्जी, चार चपाती, चावल या पुलाव, दही और सलाद के साथ शाकाहारी थाली की कीमत 12.50 रुपये। मांसाहारी थाली की कीमत 22 रुपये। दही चावल केवल 11 रुपयों में उपलब्ध है। वेज पुलाव आठ रुपये, चिकन बिरयानी 34 रुपये, फिश करी और चावल 13 रुपये, राजमा चावल सात रुपये, चिकन करी 20.50 रुपये चिकन मसाला 24.50 रुपये और बटर चिकन 27 रुपये।
खीर की कीमत 5.50 रुपये कटोरी, छोटा फ्रूट केक 9.50 रुपये और फ्रूट सलाद की कीमत सात रुपये है।
यह सब कहां से आ रहा है? याद रखिए इन सस्ती चीजों के पीछे भारी सब्सिडी है।
एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए संसद की कैंटीनों के लिए 5.3 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। इसमें लोकसभा ने करीब 3.55 करोड़ रुपये और राज्यसभा ने 1.77 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
अधिकारी ने बताया कि अंतिम बार संसद भवन में खाने की कीमतों की समीक्षा वर्ष 2004 में की गई थी।
तेलुगू देशम पार्टी के सांसद के.येरन नायडू की अध्यक्षता में वर्ष 2005 में एक खाने की दरों की समीक्षा के लिए एक संसदीय समिति का गठन किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी और दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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