हिमालय को नुकसान पहुंचा रहे हैं कालिख और धूल: नासा
कोपेनहेगन, 16 दिसम्बर (आईएएनएस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा किए गए एक नए अध्ययन के मुताबिक ग्रीनहाउस गैसों की तरह ही कालिख और धूल भी हिमालय का तापमान बढ़ा रहे हैं।
नासा के 'गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर' में वायुमंडलीय विज्ञान प्रमुख विलियम लेउ द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक कालिख की वजह से पूरे दक्षिण एशिया में लकड़ी और गोबर से जलने वाले चूल्हे हैं।
वर्ष 2000 और 2007 के बीच दक्षिण एशिया में कालिख और धुंए के जमाव और इस काल के दौरान हवा के बहाव के स्वरूपों को दर्शाने वाला यह अध्ययन 7-18 दिसम्बर तक चलने वाले जलवायु सम्मेलन में उपलब्ध रहेगा।
अध्ययन में दक्षिण एशिया से हवा के बहाव के साथ तिब्बती पठार में जाकर जमा होने वाली कालिख और धूल के विषय में अधिक बात की गई है। हिमालय की दक्षिणी ढलानों पर भी कालिख और धूल जमा हो रही है।
अध्ययन में कैलीफोर्निया के सेन डियागो स्थित 'स्क्रिप्स इंस्टीट्यूशन ऑफ ओशिएनोग्राफी' के वीरभद्रन रामनाथन की बात की पुष्टि करते हुए कहा गया है कि कालीख और धूल का हिमालय का तापमान बढ़ाने में उतना ही योगदान है जितना कि ग्रीनहाउस गैसों का है।
लेउ का कहना है कि इस गर्मी से हिमालय के ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की वजह से यहां से निकलने वाली नदियों पर आश्रित रहने वाले 1.3 अरब लोगों के लिए जल आपूर्ति का खतरा पैदा हो जाएगा।
नासा के वैज्ञानिकों ने पाया है कि हर साल अप्रैल और सितम्बर के महीने में तिब्बती पठार के दक्षिणी छोरों से बर्फ तेजी से पिघलती है और इसी समय उत्तर भारत और नेपाल में कालिख और धूल की सांद्रता अधिक होती है।
कालिख और धुंए की वजह से एक काली गंदली की चादर बन जाती है, जिसे 'एशियन ब्राउन क्लाउड' कहते हैं।
जीवाश्म ईंधन के ठीक से न जलने के कारण कालिख बनती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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