एफबीआई ने न्यायालय से कहा, राणा गांधी नहीं

वाशिंगटन, 15 दिसम्बर (आईएएनएस)। मुंबई हमले की साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार तहव्वुर हुसैन राणा के स्वयं को एक अहिंसावादी व्यक्ति के रूप में पेश करने पर सवाल खड़ा करते हुए अभियोजन पक्ष ने कहा कि 'वह गांधी नहीं है।'

शिकागो के संघीय न्यायालय में सोमवार को दायर दस्तावेजों में अभियोजन पक्ष ने कहा, "यह विडंबना है कि वह ऐसे व्यक्ति का नाम ले रहा है जो अहिंसा के सिद्धांत का जनक और सत्य बोलने वाला था। आतंकवादियों की प्रशंसा और समर्थन करने वाला राणा न्यायालय को गुमराह करना चाहता है।"

राणा की जमानत का विरोध करते हुए अभियोजन ने कहा कि यदि गिरफ्तारी के बाद के राणा के झूठे दावे को मान भी लिया जाए कि लश्कर-ए-तैयबा के एक मुख्य योजनाकर्ता से उसके संबंध केवल कश्मीर पर हमले से संबंधित थे, तो भी स्पष्ट है कि राणा गांधी नहीं है।

एफबीआई के ताजा साक्ष्यों के अनुसार पाकिस्तान में पैदा हुआ शिकागो का व्यापारी तहव्वुर हुसैन राणा मुंबई पर लश्कर-ए-तैयबा द्वारा किए गए आतंकवादी हमले के बारे में पहले से जानता था और उसने हत्यारों को मुबारकबाद दी थी।

अभियोजक ने कहा कि एक अन्य पाकिस्तानी-अमेरिकी डेविड कोलमैन हेडली के साथ पिछले महीने गिरफ्तार हुए राणा ने 26 नवंबर 2008 को हुए हमले के बारे में सबसे पहले दुबई यात्रा के दौरान सुना था।

अभियोजक पक्ष ने कहा कि राणा आतंकवादियों को साजो सामान उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार था और उसने हमले के बाद अच्छी योजना और कार्यान्वयन के लिए आतंकवादी संगठन को बधाई दी।

सहायक अमेरिकी अभियोजक डेनियल कोलिंस ने न्यायालय को बताया कि राणा को मुंबई के बारे में पहले बताया गया था और उसने हमले के बाद हमलावरों को बधाई दी थी।

एफबीआई ने राणा और हेडली के बीच सात सितम्बर 2007 को हुई टेलीफोन पर बातचीत का रिकार्ड पेश किया और कहा कि दोनों मुंबई पर हमले के बारे में चर्चा कर रहे थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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