दिनाकरन के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी

यह स्थिति तब पैदा हुई है, जब सर्वोच्च न्यायालय के पांच वरिष्ठ न्यायाधीशों की समिति और केंद्र सरकार ने दिनाकरन को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत न करने का फैसला किया है।

चेन्नई स्थित फोरम फॉर जूडिशियल एकाउंटेबिलिटी के संयोजक आर. वैगै ने रविवार को आईएएनएस को बताया कि 50 से अधिक राज्यसभा सदस्यों ने दलगत राजनीति से उपर उठ कर महाभियोग प्रस्ताव लाने की याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं। इस याचिका को एक या दो दिनों के भीतर उप राष्ट्रपति एम. हामिद अंसारी को सौंप दिया जाएगा, ताकि वह न्यायमूर्ति दिनाकरन को हटाने की प्रक्रिया शुरू करें।

वैगै ने कहा कि इस याचिका पर हस्ताक्षर करने वालों में भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वाम दलों के सांसद शामिल हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सचिव और राज्यसभा सदस्य डी.राजा से जब पूछा गया कि क्या वह और उनकी पार्टी इस महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन कर रही है, इस पर उन्होंने कहा, "हां, हम इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं। हमने इस पर हस्ताक्षर किए है।"

महाभियोग का प्रस्ताव लाने के लिए राज्यसभा के कम से कम 50 या फिर लोकसभा के 100 सांसदों के हस्ताक्षर की जरूरत होती है। हस्ताक्षरों की जांच के बाद संबंधित याचिका राज्यसभा के सभापति अथवा लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी जाती है।

हस्ताक्षरित याचिका पाने के बाद राज्यसभा के सभापति तीन सदस्यीय समिति गठित करते हैं, जिसमें एक सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश, एक उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश और एक न्यायविद् शामिल होता है। यह समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट सदन को सौंप देती है।

यदि यह समिति दिनाकरन को दोषी पाती है और उन्हें पद से हटाने की सिफारिश करती है तो मामले को संसद में मतदान के लिए पेश किया जाएगा। वहां दोनों सदनों में यह प्रस्ताव दो तिहाई बहुमत से पारित होने पर दिनाकरन के पद से हटने का रास्ता साफ हो पाएगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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