्रप्रस्तावित तेलंगाना राज्य को लेकर आंध्र में राजनीतिक संकट (लीड-2)

राज्य में एक ओर जहां तेलंगाना इलाके में खुशी का माहौल है वहीं प्रदेश के आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों के कई विधायक और सांसदों ने केंद्र के फैसले के विरोध में इस्तीफा दे दिया है।

बुधवार को देर रात केंद्र सरकार द्वारा लिए इस फैसले के विरोध में आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र के कम से कम से 92 विधायकों और कई सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है। सत्ताधारी कांग्रेस के 39, मुख्य विपक्षी दल तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के 38 और प्रजा राज्यम पार्टी (पीआरपी) के 15 विधायकों ने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को भेज दिया है। कांग्रेस और तेदेपा के 38 विधानपरिषद सदस्यों ने भी इस्तीफा दे दिया है।

इस बीच विपक्षी दलों के अलावा कांग्रेस सांसदों और विधायकों के इस्तीफे को देखते हुए मुख्यमंत्री के. रोसैया ने भी इस मामले में जल्दबाजी न करने का संकेत दिया है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि तेलंगाना के गठन का प्रस्ताव विचार विमर्श के बाद ही विधानसभा में पेश किया जाएगा। उन्होंने सांसदों और विधायकों को आक्रोशित न होने और इस्तीफा न देने की सलाह देते हुए कहा कि प्रस्ताव पेश करने की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं की गई है।

उन्होंने कहा, "केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इसका अर्थ यह नहीं है कि यह फौरन पेश कर दिया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया है और इस प्रक्रिया के कई चरण हैं। हमें अन्य क्षेत्रों की जनता से भी बात करनी होगी।"

विरोधी तेवर अख्तियार करने वाले इन विधायकों और सांसदों ने केंद्र सरकार के इस 'एकपक्षीय' निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन करने की भी धमकी दी।

इधर, संसद में भी तेलंगाना के गठन का मुद्दा छाया रहा। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा में कहा कि नए तेलंगाना राज्य के गठन के बारे में केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश सरकार से जानकारी का इंतजार कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय देर रात लिया गया और अभी तक राज्य से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी की सरकार से बयान देने की मांग के जवाब में मुखर्जी ने कहा, "इस समय हम कोई बयान नहीं दे सकते।" उन्होंने कहा कि सरकार तेलंगाना के गठन को लेकर उठाए गए कदमों के बारे में एक या दो दिन में सदन को जानकारी उपलब्ध करा देगी।

राज्यसभा में तेलंगाना मुद्दे पर दो बार हंगामा हुआ। संसद का सत्र जारी होने के बावजूद तेलंगाना के गठन के बारे में सदन के बाहर सार्वजनिक घोषणा करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गृह मंत्री पी. चिदंबरम पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया।

चिदंबरम ने कहा कि पृथक तेलंगाना राज्य की मांग के मसले पर सरकार के पास संसद के बाहर बयान देने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। इसके बाद ही सदन में शांति कायम हो सकी।

चिंदबरम ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा, "भाजपा ने जब बुधवार को इस मसले को सदन में उठाया तो सरकार उत्तर देने की स्थिति में नहीं थी क्योंकि इस पर मंत्रणा चल रही थी। मंत्रणा देर रात तक पूरी हुई और हम इस पर बयान देने में विलंब नहीं कर सकते थे।"

इस सबके बीच अलग तेलंगाना राज्य बनाने की घोषणा से नाराज आंध्र प्रदेश के कुछ कांग्रेसी सांसदों ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने का फैसला किया है। इन सांसदों को अपने-अपने क्षेत्र की जनता का कोपभाजन बनने का डर सता रहा है।

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर से सांसद अनंथा वेंकटारामी रेड्डी ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "मैं राज्य के कुछ सांसदों के साथ पार्टी प्रमुख से मिलने जा रहा हूं। हमने अपना इस्तीफा सौंपने का फैसला किया है। हम आखिर अपने क्षेत्र की जनता का सामना कैसे करेंगे?"

रेड्डी ने बताया कि बुधवार की रात भी उन्होंने कुछ सांसदों के साथ सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। वह कहते हैं, "हमें इसका कतई अंदाजा नहीं था कि तेलंगाना राज्य के निर्माण का फैसला होने जा रहा है। पार्टी आलाकमान ने हमें इस मुद्दे पर अंधेरे में रखा।" रेड्डी ने कहा, "हम जनता की आवाज हैं। हम अखंड आंध्र प्रदेश के पैरोकार हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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