एक ख़ास सफलता

अमरीकी डॉक्टरों ने कहा है कि कैंसर से प्रभावित गुर्दे को अन्य मरीज़ों में लगाने की विवादास्पद तकनीक में सफलता पाई गई है.
इस तकनीक में ऐसे व्यक्तियों के गुर्दे लिए गए जिनमें कैंसर के लक्षण या चिन्ह पाए गए.
अमरीका में यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैरीलैंड के स्कूल ऑफ़ मेडिसिन में अभी इस तकनीक के तहत पाँच मरीज़ों को इस तरह के गुर्दे लगाए गए हैं.
डॉक्टरों का कहना है कि इस तकनीक से उन लोगों में जीवन जीने की उम्मीद बंधती है जिनके गुर्दे ख़राब हो चुके होते हैं और अगर वे स्वस्थ गुर्दे के लिए लंबा इंतज़ार करें तो उनकी मौत भी हो सकती है इसलिए कैंसर प्रभावित गुर्दा भी लगाना उनके लिए जीवनदाई उपाय हो सकता है.
जिन पाँच मरीज़ों में इस तरह के गुर्दे प्रतिरोपित किए गए हैं उनमें से किसी में भी कैंसर नहीं विकसित हुआ है.
डॉक्टरों का ये भी कहना है कि ये गुर्दे लगाने से पहले मरीज़ों और गुर्दा दान करने वाले लोगों के साथ विस्तृत विचार विमर्श किया गया ताकि दोनों ही पक्ष ख़तरों और जोखिम से भली-भाँति परिचित रहें.
इन ख़तरों में ये भी था कि जिन लोगों के गुर्दे दान किए जा रहे हैं उनमें कैंसर का पता चल चुका है और जिन लोगों में ये गुर्दे लगाए जाने थे उनमें भी कैंसर हो सकता है.
ऑपरेशन करने वाली टीम के प्रमुख डॉक्टर माइकल फ़ेलन का कहना था, "किसी व्यक्ति का कैंसर प्रभावित गुर्दा किसी और व्यक्ति को लगाना बहुत विवादास्पद और भारी ख़तरे वाला काम है. हालाँकि बीमार लोगों के अंग दान करने की भारी क़िल्लत है और बहुत से लोग सिर्फ़ अंगों का इंतज़ार करते हुए मौत की गोद में चले जाते हैं. ऐसी स्थिति को देखते हुए पाँच अंग दान करने वालों और पाँच अन्य मरीज़ों ने इस ऑपरेशन को कराने का फ़ैसला किया. जबकि गुर्दे दान करने वाले लोगों के अंगों में कैंसर के कुछ लक्षण पाए गए थे."
जोखिम और फ़ायदा
इन गुर्दों को दानदाता लोगों के शरीर से अलग किया गया, बर्फ़ पर रखा गया और उसके बाद उन्हें दूसरे मरीज़ों में स्थापित करने के लिए ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया.
इन गुर्दों से कैंसर के तमाम लक्षण यानी छोटे-छोटे चिन्ह हटा दिए गए और उसके बाद उन गुर्दों को अन्य मरीज़ों में प्रतिरोपित कर दिया गया.
इस ऑपरेशन के बाद एक मरीज़ की मौत हुई है लेकिन वो मौत इस गुर्दा प्रत्यारोपण के बजाय किसी अन्य दुर्घटना से हुई बताई गई है लेकिन बाक़ी चार बिल्कुल ठीक बताए गए हैं.
डॉक्टर माइकल फ़ैलन ने जर्नल ऑफ़ ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ़ यूरोलोजिकल सर्जन्स को बताया कि इस ऑपरेशन से यह पुष्टि होती है कि जोखिम वाले गुर्दे भी किसी अन्य व्यक्ति के लिए जीवनदायी साबित हो सकते हैं.
उन्होंने कहा, "इस अध्ययन में ये तथ्य साबित होते हैं कि कैंसर से प्रभावित किसी मरीज़ के गुर्दे भी उन लोगों के काम आ सकते हैं जिन्हें अंगों के इंतज़ार में सिर्फ़ मौत का इंतज़ार करना पड़ता है, हालाँकि शर्त ये है कि उन गुर्दों पर कैंसर का ज़्यादा असर नहीं होना चाहिए."
डॉक्टर माइकल फ़ैलन का कहना था कि कैंसर से प्रभावित गुर्दों को बिल्कुल साफ़-सुथरा करके अन्य मरीज़ों में लगाया जा सकता है जिससे उनकी जीवन क्षमता बढ़ सकती है लेकिन ऐसे मामलों में गुर्दे दान करने वाले और ये गुर्दे ग्रहण करने वाले मरीज़ों को सघन चिकित्सा की ज़रूरत होती है.












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