कोपेनहेगन सम्मेलन: संयुक्त राष्ट्र ने उपायों का खुलासा किया
कोपेनहेगन, 7 दिसम्बर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन के शीर्ष अधिकारी ने उन उपायों का खुालासा किया जिन पर सोमवार से शुरू हो रहे कोपेनहेगन सम्मेलन के दौरान सरकारों के बीच सहमति तैयार होगी। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के नेताओं ने त्वरित कार्रवाई के लिए ठोस प्रस्ताव रखे हैं।
सम्मेलन आरंभ होने से एक दिन पहले जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संधि प्रारूप (यूएनएफसीसीसी) के कार्यकारी सचिव यवो डी बोअर ने कहा, "अगले दो हफ्तों में सरकारें जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ठोस और दीर्घकालिक उपायों की घोषणा करेंगी।"
ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नियंत्रित करने का आह्वान करने वाली यूएनएफसीसीसी पहली अंतर्राष्ट्रीय संधि है और जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों पर सहयोग करने की आधार संस्था के रूप में काम करती है।
डी बोअर ने उस त्रिस्तरीय कार्यक्रम के बारे में बताया, जिस पर सम्मेलन के दौरान सरकारों को सहमत होना चाहिए। पहला-जलवायु परिवर्तन पर तुरंत तेज और प्रभावी कार्रवाई, दूसरा-उत्सर्जन में व्यापक कटौती और उत्सर्जन की सीमा तय करने सहित कमजोर देशों को सहायता की प्रतिबद्धता, तीसरा-सभी के लिए दीर्घकालीक कम उत्सर्जन वाली कार्यनीति।
डीबोअर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर पिछले 17 वर्षो की वार्ताओं के दौरान कभी इतने अधिक देशों ने ऐसा वादा नहीं किया। अब रोज ही देश उत्सर्जन में कटौती के नए लक्ष्यों की घोषणा कर रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन रोकने के संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों के लिए जिम्मेदार डी बोअर ने कहा, "कोपेनहेगन एक मील का पत्थर होगा।"
डी बोअर के अनुसार जलवायु परिवर्तन से निपटने में विकासशील देशों की मदद के लिए विकसित देशों को वर्ष 2012 तक 10 अरब डॉलर की रकम की उपलब्ध कराने के लिए प्रयास तेज करने की आवश्यकता है।
क्योटो प्रोटोकॉल के तहत तय उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों के नवीनीकरण और वर्ष 2012 के बाद वार्ता की रुपरेखा तय करने के लिए कोपेनहेगन में 192 देशों के 15,000 से अधिक प्रतिनिधि जुट रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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