डाक्टरों ने मासूम के फेफड़े में फंसा कलम का ढक्कन निकाला
कोलकाता, 7 दिसम्बर (आईएएनएस)। सफीकुल मंडल को कतई उम्मीद नहीं थी कि उनका नौ वर्षीय पुत्र सामान्य जिंदगी जी पाएगा, लेकिन कोलकाता के डाक्टरों ने उसके फेफड़े से कलम का ढक्कन निकालकर उसकी हंसी लौटा दी है। एक दिन कलम से खेलते वक्त उसे इतनी जोर से छींक आई कि पलक झपकते ही ढक्कन उसके मुंह से होते हुए फेफड़े में जा धंसा।
सफीकुल का दूसरा बेटा इमरान इस साल 17 अक्टूबर को इस हादसे का शिकार बना था। अपनी शरारतों में लीन इमरान को अचानक छींक आई और कलम का ढक्कन गले से उतरते हुए फेफड़े तक जा पहुंचा। इमरान दर्द से कराह उठा और उसने माता-पिता को इस घटना के बारे में बताया।
वे उसे एक स्थानीय डाक्टर के पास ले गए। एक्स-रे के बावजूद ढक्कन के फेफड़ में फंसे होने की पुष्टि नहीं हुई। सफीकुल कहते हैं, "इस घटना के बाद इमरान को हमेशा जुकाम और खांसी की शिकायत रहने लगी। खासंते वक्त उसका शरीर और खासकर चेहरा नीला पड़ जाता था। मैंने उसके ठीक होने की उम्मीद छोड़ दी थी।"
सफीकुल ने तक अपने बेटे को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जाने-माने पल्मोनोलॉजिस्ट रंजन दास के नेतृत्व में एक टीम ने इस बच्चे पर नियमित नजर रखी। बच्च के सीटी स्कैन किया गया। इससे इसकी पुष्टि हो गई कि फेफड़े के किस हिस्से में ढक्कन फंसा है।
इसके बाद डाक्टरों ने फाइबर ऑप्टिक ब्रोंकोस्कोप का इस्तेमाल कर ढक्कन बाहर निकाला। दास कहते हैं, "अगर कुछ दिन और यह ढक्कन नहीं निकाला जाता तो बच्चे की जान जा सकती थी। अब वह सामान्य जिंदगी जी पाएगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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