पाक सर्वोच्च न्यायालय में एनआरओ पर सुनवाई शुरू
इस्लामाबाद, 7 दिसम्बर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश (एनआरओ) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार मुहम्मद चौधरी की अध्यक्षता में 17 न्यायाधीशों की बड़ी खंडपीठ का गठन किया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने एनआरओ को चुनौती देते हुए कहा है कि यह आम जनता के मौलिक अधिकारों का हनन है, राजनीतिक न्याय के खिलाफ है और भष्ट्राचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के भी विरुद्ध है। भष्ट्राचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में पाकिस्तान भी शामिल है।
पाकिस्तान के कार्यवाहक अटार्नी जनरल शाह खवर ने सोमवार को मीडिया को बताया कि पाकिस्तान सरकार सर्वोच्च न्यायालय में एनआरओ का बचाव नहीं करेगी और सभी राज्य सरकारों ने भी एनआरओ का बचाव करने से इंकार कर दिया है।
प्रधान न्यायाधीश ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय की मदद के लिए तीन सलाहकारों को नियुक्त किया है। इन वकीलों को अक्टूबर 2007 में भी इस मामले में न्यायालय की मदद के लिए नियुक्त किया गया था।
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो और वर्तमान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को स्वदेश लौटने की इजाजत देने के लिए राजनीतिक सौदेबाजी के तहत वर्ष 2007 में एनआरओ लागू किया था।
एनआरओ से उन राजनीतिक नेताओं और अधिकारियों को राहत मिली थी जिनके खिलाफ वर्ष 1985 से 1999 के दौरा भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इससे 8,041 लोगों को लाभ मिला, इनमें नेताओं के अलावा नौकरशाह और राजनयिक भी शामिल हैं। जरदारी, आतंरिक मंत्री रहमान मलिक और रक्षा मंत्री अहमद मुख्तार भी इस सूची में शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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