हथकड़ी में कोई शांति वार्ता नहीं हो सकती : राजखोवा (राउंडअप)

गुवाहाटी, 5 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्रतिबंधित संगठन, युनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के गिरफ्तार संस्थापक अध्यक्ष अरविंद राजखोवा ने शनिवार को कहा कि उनका संगठन भारत सरकार के साथ शांति वार्ता नहीं करेगा। राजखोवा ने दावा किया कि उन्होंने न तो आत्पसमर्पण किया है और न तो कभी आत्मसमर्पण करेंगे ही। राजखोवा और उसके दो सहयोगियों को यहां एक अदालत में पेश किया गया और अदालत ने उन्हें 12 दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया।

गुवाहाटी में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश किए जाते समय राजखोवा ने संवाददाताओं को बताया, "हथकड़ी में सरकार के साथ कोई शांति वार्ता नहीं हो सकती, क्योंकि कैदी किसी वार्ता में हिस्सा नहीं ले सकते। मैंने न तो सरकार के सामने आत्मसमर्पण किया है और न कभी भविष्य में आत्मसमर्पण करूंगा ही।"

राजखोवा (53), राजू बरुआ और राजा बोरा को यहां की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने तीनों को 12 दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया, जबकि सरकारी वकील ने 14 दिनों की पुलिस हिरासत की मांग की थी।

राजू बरुआ ने भी कहा कि उसने आत्मसमर्पण नहीं किया है। भारी सुरक्षा के बीच तीनों को एक बस की ओर ले जाते समय बरुआ ने कहा, "मैं पूरी तरह साफ कर दूं कि मैंने आत्मसमर्पण नहीं किया है।"

तीनों विद्रोहियों को हथकड़ी में अदालत में पेश किया गया। इस दौरान वहां अदालत में राजखोवा जिंदाबाद के नारे भी गूंजे।

हजारों लोग शनिवार तड़के से अदालत परिसर में जमा हो गए थे। उल्फा प्रमुख के छोटे भाई अजय राजकंवर ने आईएएनएस को बताया, "मैंने लगभग 30 वर्षो बाद अपने भाई को देखा है और उससे बात की है। यह एक भावुक क्षण था और उसने कहा कि उसने आत्मसमर्पण नहीं किया है।"

इसके पहले सरकार ने दावा किया था कि राजखोवा और बरुआ ने शुक्रवार को अपने परिजनों सहित मेघालय में आत्मसमर्पण कर दिया था। आत्मसमर्पण करने वालों में राजखोवा और उसकी पत्नी कावेरी व दो बच्चे, राजू बरुआ और उसकी पत्नी और एक बच्चा, राजखोवा का निजी सुरक्षाकर्मी राजा बोरा एवं उल्फा के स्वयंभू विदेश सचिव साशा चौधरी की पत्नी व उनका पुत्र शामिल हैं।

आत्मसमर्पण करने वाले उल्फा नेताओं को हेलीकॉप्टर के जरिए गुवाहाटी लाया गया। इन लोगों को असम पुलिस की चौथी बटालियन के मुख्यालय में रखा गया।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उल्फा नेताओं की पत्नी और बच्चों को नहीं गिरफ्तार किया गया है और इन लोगों पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है।

वरिष्ठ वकील बिजोन महाजन ने आईएएनएस से कहा था, "राजखोवा और बरुआ के परिजनों ने हमसे कानूनी मदद के लिए संपर्क किया था और हम उन्हें कानूनी सहायता मुहैया करा रहे हैं।"

उल्फा नेताओं से शुक्रवार को मुलाकात करने वाले एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने राजखोवा को संतुलित और शांत व्यक्ति बताया है।

असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने उल्फा नेताओं के आत्मसमर्पण का स्वागत करते हुए कहा था कि इससे राज्य में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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