राजखोवा को सुरक्षित रास्ता दे सकती है सरकार
गुवाहाटी, 3 दिसम्बर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार प्रतिबंधित संगठन युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के संस्थापक एवं अध्यक्ष अरविंद राजखोवा के पकड़े जाने को गिरफ्तारी का नाम देने के बजाय आगामी शांति वार्ता के मद्देनजर उसे सुरक्षित रास्ता दे सकती है। एक खुफिया अधिकारी ने यह बात कही।
एक खुफिया अधिकारी ने बताया, "आगामी शांति वार्ता में राजखोवा की सेवाएं लेने के लिए भारत सरकार उसे सुरक्षित रास्ता दे सकती है। वैसे भी केंद्र ने सरकार राजखोवा के बारे में ज्यादा विवरण नहीं दिया है। मसलन उसे गिरफ्तार किया गया है या उसने आत्मसमर्पण किया है या फिर वह खुद भारतीय अधिकारियों के साथ आया है।"
खबर आई थी कि बांग्लादेश से पकड़े गए राजखोवा को बुधवार को बांग्लादेशी अधिकारियों ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ ) के हवाले कर दिया। खुफिया सूत्रों ने बुधवार को इस बात की पुष्टि की थी कि राजखोवा को बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया और उसे भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया।
खबरों में कहा गया है कि बुधवार रात ही राजखोवा को दिल्ली ले जाया गया हांलाकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के बुधवार को राज्यसभा में दिए एक बयान से स्पष्ट हो गया कि सरकार पहले से ही उल्फा के संपर्क में थी। चिदंबरम ने कहा था कि उल्फा नेतृत्व अगले दो दिनों में एक राजनीतिक बयान जारी करेगा।
असमी भाषा के समाचार पत्र 'असोमिया प्रतिदिन' के संपादक हैदर हुसैन ने आईएएनएस से कहा, "उच्च स्तर पर जरूर कुछ चल रहा है और यही वजह है कि पूरे घटनाक्रम को गुप्त रखा गया है।"
असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ताजा घटनाक्रम के बारे में गुरुवार को दिन 12.30 बजे एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार देबो कुमार बोरा का कहना है कि गोगोई सूचनाओं को मीडिया के साथ बांटेंगे।
उधर, राजखोवा की 'गिरफ्तारी' की खबर पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आनी आरंभ हो गई हैं। उल्फा के शांति वार्ता के पक्षधर धड़े के नेता मृणाल हजारिका ने कहा, "हम आशा करते हैं कि अब राजखोवा शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाएंगे। अगर सरकार के साथ बातचीत के लिए वह तैयार होते हैं तो हम सभी उनके साथ हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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