'ब्रिक की भूमिका और प्रभावी बनाई जाए'

'ब्रिक की भूमिका और प्रभावी बनाई जाए'

ब्रिक देशों के समूह ने जी-20 देशों की बैठक के ठीक पहले कहा है कि उनकी भूमिका को और प्रभावी बनाने की ज़रूरत है.

भारत, रूस, ब्राज़ील, और चीन- इन चार देशों के समूह, ब्रिक ने मांग की है कि आर्थिक संकट के मद्देनज़र अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में बदलावों और वैश्विक वित्तीय नीतियों की दिशा के पुनर्निर्धारण में उनकी भूमिका ज़्यादा प्रभावी बनाई जाए.

चारों देशों के वित्त मंत्रियों ने शुक्रवार को लंदन में एक सयुंक्त बैठक के बाद जारी वक्तव्य में कहा कि स्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विश्व मुद्रा कोष जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलावों की ज़रूरत है. साथ ही बदलाव की इस प्रक्रिया में विकासशील देशों की बराबर हिस्सेदारी होनी चाहिए.

भारत के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी समेत ब्राजील, रूस और चीन के वित्तमंत्री जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए लंदन पहुंचे हुए हैं.ब्रिक देशों की आधिकारिक तौर पर ये दूसरी बैठक है. इससे पहले वे इस साल जून के महीने में रूसी शहर येकतरिन में बैठक कर चुके हैं.

बैठक के बाद हुई पत्रकार वार्ता में ब्रिक देशों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को 80 अरब डॉलर की सहायता देने की घोषणा भी की है. इसमें से 10 अरब डॉलर की राशि भारत की ओर से दी जा रही है.

बैठक की अध्यक्षता कर रहे ब्राजील के वित्त मंत्री गाईडो मनटेगा ने कहा कि पिछले एक साल में आर्थिक मंदी से उबरने के लिए दुनियाभर में किए गए उपाय सकारात्मक संकेत तो दे रहे हैं लेकिन एग्ज़िट स्ट्रैटेजी या सरकारों द्वारा पीछे हाथ खींचने का सही वक्त अभी नहीं आया है.

संरक्षणवाद पर चिंता

वहीं चारों वित्त मंत्रियों ने एक ही स्वर में संरक्षणवाद के प्रति भी चिंता जताई. चीन के वित्त मंत्री शी शुरेन ने कहा कि विकसित देशों को अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बचाने के लिए संरक्षणवाद का सहारा नहीं लेना चाहिए और विकासशील देशों के हितों को ध्यान में रखना चाहिए.

उधर रूस के वित्त मंत्री एलेक्सी कुदरिन ने कहा कि आर्थिक संकट की वजह से चीन, भारत और ब्राज़ील के मुकाबले रूस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है. उन्होंने कहा कि तेल के दाम घटने और उसकी मांग में कमी आने की वजह से रूस की जीडीपी में 8.5 प्रतिशत की गिरावट आई. लेकिन आने वाले समय में उसकी अर्थव्यवस्था में 1.6 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी के आसार नज़र आ रहे हैं.

उधर प्रणब मुखर्जी ने भी आशा जताई कि आर्थिक संकट से उबरने के प्रयास अगर इसी तरह से सकारात्मक संकेत देते रहे तो भारत की अर्थव्यवस्था 2009-10 में फिर से 9-10 प्रतिशत की विकास दर तक पहुंच सकती है.

वहीं दुनियाभर में कारोबार के लिए अमरीकी डॉलर की बजाय किसी और मानक मुद्रा के प्रस्ताव के संबध में जब बीबीसी ने प्रणब मुखर्जी से सवाल पूछा तो उन्होने कहा कि इस विषय पर कोई बातचीत नहीं हुई.

गौरतलब है कि पिछली बैठक में ब्रिक देशों ने, खासतौर से चीन और रूस ने, इस संवेदनशील मुद्दे पर काफी विचार विमर्श किया था. चीन और रूस काफी समय से अमरीकी डॉलर की बजाय किसी और मुद्रा को इस्तेमाल करने की पैरवी कर रहे हैं. वहीं चारों देशों ने अपने वक्तव्य में पर्यावरण संबंधी चिंताओं का भी उल्लेख किया. ब्रिक देशों ने कहा कि उन्हे उम्मीद है कि इस साल के आखिर में कोपनहेगन में होने वाला सयुंक्त राष्ट्र का जलवायु परिवर्तन सम्मेलन सफल रहेगा, और वे इस मामले में सयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित किये गए लक्ष्यों को हासिल करने के दिशा में काम करते रहेंगे.

साल 2001 में विश्व के जाने माने इनवैस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने ब्रिक शब्द का प्रयोग करते हुए पहली बार ये भविष्यवाणी की थी कि 2050 तक ये चारों देश विश्व की सबसे बड़ी अर्थशक्ति बनने का सामर्थ्य रखते हैं.

इन देशों के पास दुनिया की एक चौथाई से भी ज्यादा ज़मीन है और इनकी धरती पर दुनिया की 40 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या वास करती है.

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