नए उद्यमियों को नहीं मिल रही पूंजी
नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। बाजार पूंजी के सहारे प्रारंभिक उद्यम लगाने का सपना पालने वाले देश के उद्यमी अब पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए कोई और रास्ता देख रहे हैं।
उद्योग जगत के निवेशकों और विशेषज्ञों का कहना है कि देश के उद्यमों में पूंजी लगाने वाले केवल उन्हीं कंपनियों में निवेश करना पसंद करते हैं जो पहले से स्थापित हैं या चल रही हों और उनको विस्तार के लिए धन की जरूरत हो। इस कारण अधिकतर नव उद्यमियों को बैंक, परिवार या मित्रों के सहारे पूंजी जुटानी होती है।
उनका कहना है कि एक नए उद्यम के लिए देश में शुरुआती पूंजी नहीं मिल पाती है।
भारतीय उद्यम पूंजी संघ की अध्यक्ष कल्पना जैन ने कहा, "देश में शुरुआती पूंजी का विचार ही मौजूद नहीं है। कुछ कोष बनाए गए हैं लेकिन उसमें काफी देरी हो चुकी है और जरूरत की तुलना वह अपर्याप्त है।"
एक वैश्विक कंपनी में वरिष्ठ निदेशक जैन ने कहा, "अमेरिका और अन्य विकसित बाजारों में उच्च जोखिम के बदले में उच्च रिटर्न हासिल होता है और उच्च रिटर्न उन उद्यमों में लगाए जाते हैं जो उड़ान भरने के लिए तैयार रहते हैं।"
उन्होंने कहा, "इसके विपरीत भारत में जो कंपनियां पहले से ही संचालित हो रही हैं और उच्च रिटर्न दे रही हैं उसमें उद्यम पूंजी लगाई जाती है। ऐसे में कोई क्यों नए उद्यम में निवेश कर जोखिम उठाएगा।"
साथ ही वर्तमान आर्थिक स्थिति के कारण भी समस्या बढ़ गई है। इस समय वित्तीय संस्थान अपनी पूंजी को नए उद्यमों में लगाकर जोखिम उठाने की बजाय सुरक्षित रखना पसंद कर रहे हैं।
'वेंचर इंटेलीजेंस' के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण नटराजन ने कहा, "वर्ष 2008 में उद्यम पूंजी कंपनियों ने 74 करोड़ डॉलर का निवेश किया जबकि इससे पहले के वर्ष में 87.6 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ था।" उन्होंने बताया कि इनमें से मुश्किल से नई परियोजना के लिए धन उपलब्ध करवाया गया होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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